Beingदलित

राजस्थान के दलित छात्र ने IIT की मुख्य परीक्षा में देश-भर में टॉप किया!!

जहां एक तरफ देश में दलितों और आदिवासियों से छुआछूत और अत्याचार की खबरें आती रहती हैं वहीं इन सबके बीच राजस्थान के 17 साल के एक दलित छात्र कल्पित वीरवल ने आईआईटी की जेईई-मेन्स परीक्षा में 360 में 360 नंबर लाकर सबको चकित कर दिया। इस परीक्षा में फुल मार्क्स लाकर उन्होंने न सिर्फ जेईई-मेन्स की परीक्षा में दलित वर्ग में टॉप किया है बल्कि जनरल कटेगरी में भी टॉप कर सबको पीछे छोड़ दिया। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत का सहारा लिया और अपने भरोसे के दम पर यह सफलता हासिल की। आपको बता दें CBSE ने आज आईआईटी-जेईई की मेन्स परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया है।



'हिंदुस्तान टाइम्स' से फोन पर बातचीत करते हुए कल्पित वीरवल ने बताया कि CBSE के अध्यक्ष आर के चतुर्वेदी ने सुबह फोन करके उन्हें इसकी खबर दी थी। वीरवल ने कहा कि जेईई-मेन्स में टॉप करना मेरे लिए खुशी की बात है लेकिन मैं अभी जेईई-एडवांस की परीक्षा के लिए फोकस करना चाहता हूं जो कि अगले महीने आयोजित होगी।

आपको बता दें कि वीरवल ने इसी साल MDS पब्लिक स्कूल से 12वीं की परीक्षा दी है जिसका रिजल्ट आना अभी बाकी है। कल्पित ने बताया कि उन्होंने रेगुलर क्लास करके और कभी भी क्लास मिस नहीं करके अपने आत्मविश्वास को ऊंचा बनाए रखा। वीरवल ने बताया कि कोचिंग और स्कूल की पढाई के अलावा वे रोजाना पांच से छ: घंटे की पढ़ाई करते हैं। 

कल्पित ने बताया कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके मम्मी-पापा और उनके शिक्षकों का अहम योगदान है। उनके पिता पुष्कर लाल वीरवल उदयपुर के महाराणा भूपल राजकीय अस्पताल में कंपाउंडर हैं और उनकी मां सरकारी स्कूल में टीचर हैं। उनके बड़े भैया भी देश के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले मेडिकल संस्थान एम्स से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।

कल्पित को क्रिकेट और बैंडमिंटन खेलना अच्छा लगता है और उन्हें संगीत का भी शौक है। उन्होंने बताया कि अभी फिलहाल उन्होंने अपना करियर प्लान नहीं बनाया है लेकिन वह आईआईटी मुंबई में कंप्यूटर साइंस में एडमिशन लेना चाहते हैं। कल्पित ने इससे पहले इंडियन जूनियर साइंस ओलंपियाड और नेशनल टेलेंट सर्च एग्‍जामिनेशन में भी टॉप किया है।

Source:http://www.nationaldastak.com/story/view/son-of-compounder-tops-in-jee-mains
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अम्बेडकरवाद का भक्तिकाल : दलित गुलामी के नए दौर का प्रारम्भ !

जयपुर में आज 13 अप्रैल 2917 को अम्बेडकर के नाम पर "भक्ति संध्या" होगी। दो केंद्रीय मंत्री इस अम्बेडकर विरोधी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। अम्बेडकर जैसा तर्कवादी और भक्तिभाव जैसी मूर्खता ! इससे ज्यादा बेहूदा क्या बात होगी ?



भीलवाड़ा में बाबा साहब की जीवन भर विरोधी रही कांग्रेस पार्टी का एस.सी. डिपार्टमेंट दूसरी मूर्खता करेगा। 126 किलो दूध से बाबा साहब की प्रतिमा का अभिषेक किया जायेगा। अभिषेक होगा तो पंडित भी आएंगे ,मंत्रोच्चार होगा,गाय के गोबर ,दूध ,दही ,मूत्र आदि का पंचामृत भी अभिषेक में काम में लिया ही जायेगा । अछूत अम्बेडकर कल भीलवाड़ा में पवित्र हो जायेंगे!

तीसरी वाहियात हरकत रायपुर में होगी 5100 कलश की यात्रा निकाली जाएगी। जिस औरत को अधिकार दिलाने के लिए बाबा साहब ने मंत्री पद खोया ,उस औरत के सर पर कलश,घर घर से एक एक नारियल लाया जाएगा। कलश का पानी और नारियल आंबेडकर की प्रतिमा पर चढ़ाये जायेंगे। हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए जायेंगे। जिस अम्बेडकर के समाज को आज भी नरेगा ,आंगनवाड़ी और मिड डे मील का मटका छूने की आज़ादी नहीं है ,उनके नाम पर कलश यात्रा ! बेहद दुखद ! निंदनीय !



एक और जगह से बाबा साहब की जयंती की पूर्व संध्या पर भजन सत्संग किये जाने की खबर आयी है। एक शहर में लड्डुओं का भोग भगवान आंबेडकर को लगाया जायेगा।

बाबा साहब के अनुयायी जातियों के महाकुम्भ कर रहे है ,सामुहिक भोज कर रहे है,जिनके कार्डों पर गणेशाय नमः और जय भीम साथ साथ शोभायमान है।भक्तिकालीन अम्बेडकरवादियों के ललाट पर उन्नत किस्म के तिलक आप हरेक जगह देख सकते है। जय भीम के साथ जय श्री राम बोलने वाले मौसमी मेढकों की तो बहार ही आयी हुयी है।



बड़े बड़े अम्बेडकरवादी हाथों में तरह तरह की अंगूठियां फसाये हुए है,गले में पितर भैरू देवत भोमियाजी लटके पड़े है और हाथ कलवों के जलवों से गुलज़ार है,फिर भी ये सब अम्बेडकरवादी है।

राजस्थान में बाबा साहब की मूर्तियां दलित विरोधी बाबा रामदेव से चंदा ले के कर डोनेट की जा रही है।इन मूर्तियों को देख़ कर ही उबकाई आती है। कहीं डॉ आंबेडकर को किसी मारवाड़ी लाला की शक्ल दे दी गयी है ,कहीं हाथ नीचे लटका हुआ है तो कहीं अंगुली "सबका मालिक एक है " की भाव भंगिमा लिए हुए है।

 ये बाबा साहब है या साई बाबा ? मत लगाओ मूर्ति अगर पैसा नहीं है या समझ नही है तो।

 कहीं कहीं तो जमीन हड़पने के लिए सबसे गन्दी जगह पर बाबा साहब की घटिया सी मूर्ति रातों रात लगा दी जा रही है।

बाबा साहब की मूर्तियां बन रही है ,लग रही है ,जल्दी ही मंदिर बन जायेंगे ,पूजा होगी ,घंटे घड़ियाल बजेंगे,भक्तिभाव से अम्बेडकर के भजन गाये जायेंगे। भीम चालीसा रच दी गयी है,जपते रहियेगा।



गुलामी का नया दौर शुरू हो चुका है। जिन जिन चीजों के बाबा साहब सख्त खिलाफ थे ,वो सारे पाखण्ड किये जा रहे। बाबा साहब को अवतार कहा जा रहा है। भगवान बताया जा रहा है। यहाँ तक कि उन्हें ब्रह्मा विष्णु महेश कहा जा रहा है। 

हम सब जानते है कि डॉ अम्बेडकर गौरी ,गणपति ,राम कृष्ण ,ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश ,भय ,भाग्य ,भगवान् तथा आत्मा व परमात्मा जैसी चीजों के सख्त खिलाफ थे।
वे व्यक्ति पूजा और भक्ति भाव के विरोधी थे। उन्होने इन कथित महात्माओं का भी विरोध किया ,उन्होंने कहा इन महात्माओं ने अछूतों की धूल ही उड़ाई है।

पर आज हम क्या कर रहे है बाबा साहब के नाम पर ? जो कर रहे है वह बेहद शर्मनाक है ,इससे डॉ अम्बेडकर और हमारे महापुरुषों एवम महस्त्रियों का कारवां हजार साल पीछे चला जायेगा। इसे रोकिये। 

बाबा साहब का केवल गुणगान और मूर्तिपूजा मत कीजिये। उनके विचारों को दरकिनार करके उन्हें भगवान मत बनाइये । बाबा साहब की हत्या मत कीजिये। 

आप गुलाम रहना चाहते है ,बेशक रहिये ,भारत का संविधान आपको यह आज़ादी देता है ,पर डॉ अम्बेडकर को प्रदूषित मत कीजिये।

आपका रास्ता लोकतंत्र और संविधान को खा जायेगा। फिर भेदभाव हो ,जूते पड़े,आपकी महिलाएं बेइज्जत की जाये और आरक्षण खत्म हो जाये तो किसी को दोष मत दीजिये।

 इन बेहूदा मूर्तियों और अपने वाहियात अम्बेडकरवाद के समक्ष सर फोड़ते रहिये।रोते रहिये और हज़ारो साल की गुलामी के रास्ते पर जाने के लिए अपनी नस्लों को धकेल दीजिये।गुलामों से इसके अलावा कोई और अपेक्षा भी तो नहीं की जा सकती है।

 जो बाबा साहब के सच्चे मिशनरी साथी है और  इस साजिश और संभावित खतरे को समझते है ,वो बाबा साहब के दैवीकरण और ब्राह्मणीकरण का पुरजोर विरोध करे।मनुवाद के इस स्वरुप का खुल कर विरोध करे। 

अम्बेडकरवाद में भक्तिभाव  के लिए कोई जगह नहीं है ।

- भंवर मेघवंशी 
( स्वतंत्र पत्रकार एवम सामाजिक कार्यकर्ता )
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ख़ामोशी तोड़ो दलितों, आदिवासी बच्चियों के बलात्कार और हत्या पर पसरी यह चुप्पी भयानक है

आखिर राजस्थान में दो दलित छात्राओं से बलात्कार व आत्महत्या की नृसंश घटना पर इस देश में कोई मोमबत्ती क्यों नहीं जली?

राजस्थान के सीकर जिले के नीम का थाना क्षेत्र के भगेगा गाँव के एक दलित बलाई परिवार की प्रथम वर्ष में पढ़ने वाली दो सगी बहनों के साथ तीन सवर्ण युवाओं ने घर में घुस कर सामुहिक बलात्कार किया।

बलात्कारी पीड़िताओं के भाई के आ जाने के बाद भाग छूटे। 17 व 18 साल की इन दोनों दलित छात्राओं ने बलात्कार के बाद ट्रेन के आगे कूद कर जान दे दी।

ये दर्दनाक और शर्मनाक घटना 5 अप्रैल 2017 को दिन में घटी। 8 घंटे प्रयास करने के बाद नामजद मुकदमा दर्ज किया गया। मामला बलात्कार, दलित अत्याचार,नाबालिग के लैंगिक शोषण का होने के बावजूद भी जानबूझकर सिर्फ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण की धारा 306 में मामला दर्ज किया गया। इलाके के सरपंच, विधायक और पुलिस उप अधीक्षक सब आरोपियों की जाति के है। पूरे मामले को शुरू से बिगाड़ा जा रहा है।

राजस्थान में सक्रिय विभिन्न जाति संगठन ,समाज की महासभाएं, सामाजिक संगठन ,महिला संगठन ,दलों के गुलाम प्रकोष्ठ व मोर्चे तथा दलित संगठनों को भी कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। सब  अपने अपने गोरखधंधे में व्यस्त है। एक आध को छोड़ कर कोई भी इस गरीब पीड़ित दलित परिवार से मिलने तक नहीं पंहुचा।

सवाल उठता है कि महिलाओं के साथ यौनिक बर्बरता के खिलाफ जनपथ तथा जंतर मंतर पर सड़कों पर उतरने वाले साथी ,उछल उछल कर नारे लगाने वाले क्रन्तिकारी, मोमबत्तियां जलाने वाले संवेदनशील भारतीयों की संवेदना बलात्कार पीड़ित दलित आदिवासी महिलाओं के लिए संवेदन शून्यता से क्यों भर जाती है?

मुझे मालूम है कि आप सब लोग बाबा साहब की 126वी जयंती के समारोह को सफल बनाने में सलंग्न होंगे, मगर इस बार के आयोजन में अगर हम भगेगा की इन दलित बहनों के साथ हुए अमानवीय अत्याचार अन्याय के खिलाफ नहीं बोलेंगे तो फिर कब बोलेंगे?

14 अप्रैल को हर जगह इस क्रूर कांड की कड़ी भर्त्सना कीजिये, पीड़ितों के लिए न्याय मांगिये,दलित आदिवासी एवम अन्य वंचित तबके की पीड़ित स्त्रियों के लिए आवाज़ उठाइये। अगर हम ही नहीं बोलेंगे तो हमारे लिए कौन बोलेगा। कोशिश कीजिये भगेगा जाने की, पीड़ित परिवार को संबल देने की ,उनके संघर्ष में सहायक होने की।
मानव अधिकार कार्यकर्ता कैलाश मीणा का आभार, जिन्होंने इस बारे में जानकारी दी और पीड़ित परिवार से मिलवाया। आप भी इस बारे में साथी Kailash Mina से सीधे इस नम्बर  09928136988 बात कर सकते है।
इंतज़ार मत कीजिये, न्याय की लड़ाई के लिए आगे आना ही अम्बेडकर के कारवां को आगे बढ़ाना है। अगर हम भगेगा के लालचंद वर्मा के परिवार को न्याय दिला पाये तो यह अम्बेडकर जयंती मनाना सार्थक हो जायेगा।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

संपादन- भवेंद्र प्रकाश
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Dalit Groom Allegedly Beaten Up By Upper Caste Men For Riding A Horse



Upper caste men from the Rajput community in Haryana allegedly pushed a Dalit groom from his horse and beat him up for performing the ghurchari ceremony.


The incident played out on Tuesday night when Sanjay along with his family members and the rest of the baraat were making their way to the bride's house in the Sanjarwas village of Charkhi Dadri district, The Hindustan Times reported today. The upper caste men reportedly told Sanjay that Dalits were not allowed to perform ghurchari following which a scuffle ensued. Three of bride's family members, who tried to intervene, were also brutally beaten up and later hospitalized.


The police have reportedly lodged a case under relevant sections of the Indian Penal Code and the SC and the ST (Prevention of Atrocities) Act. While one person has been apprehended, the police are still looking for others who were involved in the assault.


Dalit grooms are often beaten up for riding horses. Last year, a Dalit groom in Madhya Pradesh rode to his pre-wedding ceremony under heavy police protection after upper caste men allegedly warned him against mounting a horse. Another Dalit groom in Madhya Pradesh had to wear a helmet while riding a horse as upper caste people in the village threw stones at him.
Source: http://www.huffingtonpost.in/2017/04/06/dalit-groom-allegedly-beaten-up-by-upper-caste-men-for-riding-a_a_22028638/?utm_hp_ref=in-homepage&ncid=fcbklnkinhpmg00000001
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वसुंधरा राज में दलित नाबालिग छात्रा से 8 आचार्य करते रहे डेढ़ साल से रेप



राजस्थान के बीकानेर में सरस्वती शिक्षण संस्था के आठ आचार्यों द्वारा एक नाबालिग दलित लड़की के साथ डेढ़ साल तक रेप करने का शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है।



एसपी के दखल के बाद पुलिस ने मामला दर्ज तो कर लिया लेकिन साथ ही लड़की के दो भाइयों के खिलाफ भी घर में घुसकर मारपीट करने का मामला दर्ज कर लिया है।आरोपी शिक्षक फरार हैं, लेकिन लड़की के भाइयों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

सरस्वती शिक्षण संस्था के प्राचार्य, स्कूल प्रबंधन के पदाधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है और वो सब मामले को दबाने में लगे हैं। इलाके में ये संस्था बच्चों को आदर्श नागरिक बनने, देशभक्ति और संस्कृति प्रेम का भाव जगाने वाली शिक्षा देने का दावा करती है। 



बीकानेर के नोखा इलाके में साजनवासी गांव की सरस्वती शिक्षण संस्था में पिछले डेढ़ वर्ष ये 8 शिक्षक एकअश्लील क्लिप के नाम पर 13 वर्षीय छात्रा को ब्लैकमेल करके उसके साथ रेप करते रहे। इस दौरान लड़की को इतनी ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियाँ खिलाई गईं कि उसे कैंसर हो गया। 


दुष्कर्मी शिक्षकों ने पहले स्कूल की छुट्टी के बाद बच्ची को कमरे में बंद करके उसके कपड़े उतरवाए और उसकी अश्लील क्लिप बना ली। बाद में इसे सबको दिखा देने का डर दिखाकर उसके साथ रेप करते रहे।

तंग आकर पीड़िता ने एक दिन सारी बात अपनी मां को बता दी। जिसके बाद उसके पिता और मां ने नोखा थाने में सरस्वती शिक्षण संस्था के आचार्य- वीरेन्द्र, विक्रम, विकास, पवन, हनुमान, रोहित, दुलीचंद और बिजेन्द्र के खिलाफ यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें डाँटकर भगा दिया। बाद में पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद ही रिपोर्ट दर्ज की गई।

बच्ची ने पुलिस को बताया कि सभी आचार्य स्कूल की छुट्टी हो जाने के बाद उसे डरा धमकाकर उसका यौन शोषण करते थे।

गर्भनिरोधक गोलियों के अत्यधिक सेवन से पीडिता को अब कैंसर हो गया है। उसे पीबीएम हॉस्पीटल के कैंसर रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया है। मामला सामने आने के बाद स्कूल की अन्य छात्राएं डरी हुई हैं। पुलिस किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। आठों दुष्कर्मी शिक्षक फरार है।
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नोएडा- बाबा भीमराव अम्बेडकर की मर्ति तोड़ी, तनाव



कुछ असमाजिक तत्वों ने शुक्रवार रात (24/03/2017) सारफाबाद गांव में डॉ बी आर अम्बेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया। स्थानीय लोगों ने जब शनिवार सुबह इस पार्क में पहुंचे तो उन्होंने पाया कि कुछ शरारती लोगों ने बाबा साहब की मूर्ति के हाथ और नाक तोड़ दिए हैं। ये ख़बर मिलते ही बड़ी तादाद में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया। मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में लोगों ने मौका-ए-वारदात पर विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया।



सेक्टर 73 के सर्फाबाद में एक इंडोर स्टेडिम है जिससे सटा हुआ एक पार्क में बाबा अम्बेडकर की मूर्ति लगी हुई है। पार्क के चारों तरफ सीमेंटेड बाउंडरी है। तीन तरफ से बाउँड्री वाल है और केवल सामने का हिस्सा से ही प्रवेश किया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने मूर्ति खंडित की है। निश्चित ही असमाजिक तत्वों का उद्देश्य इलाके की शांति को भंग करना होगा। इसके बाद के पूरे गांव में तनाव का माहौल है।


गौतमबुद्ध नगर के बसपा के अध्यक्ष लाल सिंह गौतम ने कहा कि बाबा साहब अम्बेडकर का सभी लोग सम्मान करते हैं। वो नहीं जानते कि आखिर किसने ऐसा घिनौना काम किया। बीएसपी ने पुलिस कप्तान और जिला प्रशासन से खंडित मूर्ति हटाकर बाबा साहब की नयी मूर्ति लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नई मूर्ति की सुरक्षा के लिए फैंसिंग की जाएगी और निगरानी के लिए के सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात किया जाएगा।


नोएडा में मूर्ति खंडित किए जाने के बाद पुलिस की टीम मौका-ए-वारदात पर पहुंची। पुलिस ने मूर्ति को फिलहाल एक कपड़े से कवर कर दिया है। सेक्टर 49 थाना के एसएचओ बिजेंद्र सिंह भड़ाना ने कहा कि इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही यहां बाबा साहब अम्बेडकर की नयी मूर्ति लगा दी जाएगी।
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गुजरात दंगों में न तो हिंदू को इंसाफ मिला न मुसलमान को बल्कि दंगा करवाने वाले दिल्ली पहुंच गए- जिगनेश मेवानी



27 फरवरी को गोधराकांड के 15 साल पूरे हो जाएंगे। गोधराकांड के बाद गुजरात में जो दंगे हुए उसको देश अभी तक भुला नहीं पाया है। गुजरात ने दंगों के दौरान जो कुछ सहा है वह दोबारा ना हो उसके लिए गुजरात के साथ-साथ पूरे देश के अमनपसंद लोग इसकी कोशिश में रहते हैं।


गुजरात के युवा क्रांतिकारी नेता जिग्नेश मेवानी ने गुजरात और देश की आम जनता से अपील की है कि, वह देश के संविधान पर विश्वास करें और धर्म की राजनीति करने वाले नेताओं से दूर रहें।
जिग्नेश ने फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड कर कहा है कि, गोधरा कांड में जो हिंदू भाई-बहनों की मौत हुई न तो उनको इंसाफ मिला और न ही उसके बाद हुए दंगों में जिन मुसलमान भाई-बहनों की मौत हुई उनको इंसाफ मिला। साथ ही जिग्नेश ने कहा कि जिन लोगों ने दंगों पर राजनीति की वह राज्य से देश की राजनीति में पहुंच गए।


जिग्नेश ने कहा कि, जिन लोगों ने दंगों में अपने लोगों को खोया उनकी हालत आज भी बहुत खराब है। दंगों के बाद मुसलमान जिन बस्तों में रह रहे हैं वहां की हालत बहुत खराब है। न साफ पीने का पानी है, ना ही उनके बच्चों के लिए सही पढ़ाई का कोई इंतजाम है और ना वहां पर अस्पताल है।
जिग्नेश ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हमें अपने देश के संविधान पर विश्वास रख उसके अनुसार चलना चाहिए। जो हमें सेक्यूलर और समाजवाद की राह दिखाता है। जहां धर्म की राजनीति करने वालों की कोई जगह नहीं है।
Source: http://boltahindustan.com/jignesh-mevani-said-beware-from-communal-politicians/
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गुजरात में गाय दलित घोषित तो राजस्थान में सुन रहीं हैं भागवत कथा!!



देश में इन दिनों गधों की जमकर तारीफ हो रही हैं और उनकी शान में क्या खूब कसीदे पढ़े जा रहे हैं. स्वयं प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि गधे उनके लिए प्रेरणा-स्रोत रहे हैं और वे गधे की तरह दिन भर काम करते हैं.
लेकिन इन दिनों भाजपा शासित राज्यों में गायों की दयनीय हालत के कई ऐसे किस्से सामने आ रहे हैं, जिन पर सोशल मीडिया में जमकर चटखारे लिए जा रहे हैं. गुजरात के मेहसाणा जिले में दलित समुदाय की गायों को दलित घोषित कर दिया गया है तो राजस्थान के सीकर जिले में 211 गायों को 211 ब्राह्मण भागवत कथा सुना रहे हैं.



आप मानें या न मानें, लेकिन राजस्थान के शेखावाटी इलाके के सीकर जिले के फतेहपुर में बुधगिरि मढ़ी पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा को स्थानीय मीडिया बहुत अद्भुत बता रहा है. भागवत कथा के लिए एक व्यास पीठ बनाई गई है और इस व्यास पीठ के पीछे 211 गायों के बैठने की विशेष जगह बनाई गई है. एक-एक गाय को एक-एक ब्राह्मण भागवत कथा सुना रहा है. हर गाय को भागवत के सभी 18000 श्लोक सुनाए जाएंगे. आयोजकों ने बाकायदा यह व्यवस्था की है कि हर गाय को हर पंडित हर रोज आठ घंटे भागवत सुनाए.
महंत दिनेश गिरि के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार सनातन धर्म का मूल आधार गाय ही है. गाय में सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास है। चारों वेद और 108 उपनिषद भी गायों में ही निहित हैं। गिरि के अनुसार शास्त्रों में कहा गया है कि कलियुग में गौ, गंगा और भागवत ही मानव की मुक्ति और मोक्ष का आधार हैं, इसलिए गायों के लिए यह विशेष अनुष्ठान किया जा रहा है. इस अनुष्ठान में हर दिन श्रद्धालु आते हैं और भागवत कथा सुनकर पवित्र होने वाली गौओं और कथावाचक ब्राह्मणों से आशीर्वाद लेते हैं.


राजस्थान सरकार के पंचायती राज और ग्रामीण विकास तथा संसदीय मामलों के मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ सहित कई बड़े नेता इस गो महिमा महोत्सव में आ चुके हैं और आए दिन लोग आ रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि यह जगह बहुत अद्भुत है और यहां लोकदेवता बुधगिरि जी महाराज ने 21 साल पहले जीवित समाधि ली थी. वे बड़े गोरक्षक थे. यह क्षेत्र उसी सीकर जिले का हिस्सा है, जिसमें 1987 में दिवराला सती कांड हुआ था. हालांकि आज यह इलाका पूरे राजस्थान में सबसे अधिक साक्षरता वाले इलाकों में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है.
मैंने लोगों से पूछा कि गाएं भागवत कथा सुनती हैं तो वे कब चारा चरती हैं और कब जुगाली करने के बाद आराम फरमाती हैं? उनका जवाब था कि गायों को सुबह आठ से बारह बजे तक भागवत कथा सुनाई जाती है. इस बीच ब्राह्मण देवता भोजन करने चले जाते हैं और गौमाता आराम करती हैं. इसके बाद दो बजे से छह बजे तक फिर गायों को फिर कथा श्रवण करवाई जाती है. लोगों ने बताया कि इस विशेष भागवत कथा के लिए जगदगुरु मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य प्रतिदिन साढ़े बारह बजे से दोपहर साढ़े तीन बजे तक मुख्य कथा सुनाते हैं. इसका लाभ गौमाता के अलावा आम भक्त भी उठाते हैं.


राजस्थान के सीकर में भले गौमाताओं को भागवत कथा सुनाई जा रही हो, लेकिन गुजरात के मेहसाणा जिले की यह कहानी एक और ही भेदभाव की दास्तान बताती है. गुजरात में पिछले दिनों गौरक्षकों ने जिस तरह मृत गायों को उठाने वाले दलितों पर जानलेवा हमले किए और जिन पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत तीखी भाषा में आलोचना की, वहां यह किस्सा सुनकर न हंसते बनता है और न रोते. गुजरात के कई प्रशासनिक अधिकारी इस पर हैरान हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इस तरह की चीजों से कैसे पार पाएं.
यह किस्सा है मेहसाना जिले के नदोली ग्राम पंचायत का. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यहां सवर्ण लोगों ने पांच दलित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया. लेकिन दलित जब अपनी गायों के लिए चारा लाने गए तो कहा गया कि दलितों की गाएं भी दलित हैं और दलित गाय के लिए चारा भी नहीं मिल सकता. दलित गाएं सवर्ण लोगों के सवर्ण खेतों का चारा कैसे खा सकती हैं. इन लोगों ने मेहसाणा के जिला कलेक्टर से गुहार लगाई, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला और गायों के सामने भी भूखों मरने की नौबत आ गई.
मेहसाणा के जिला कलेक्टर को दिए गए वेदना पत्र में इन लोगों ने स्पष्ट कहा है कि गायों के लिए चारा और पानी लाने के लिए उन्हें दूसरे गांवों में जाना पड़ता है. यह विचित्र किस्म का मामला जेरालु ताल्लुका के गांव का बताया जा रहा है. गुजरात के कई अन्य इलाकों में भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं. दलित अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लाेगों का कहना है कि गुजरात एक नई कट्टरता के दौर से गुजर रहा है और हालात वाकई में बहुत विचित्र किस्म के हो रहे हैं. पीड़ितों ने प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दी है कि गायों के बछड़ों तक के लिए पानी और चारा रोक दिया गया है.
चलिए जब गायों के दलित होने का किस्सा सुना है तो अब आप जरा गायों के बारे में यह भी जानकारी लेते चलिए कि गायों के मूत्र, गोबर, दूध, घी और दही के पंचगव्य पर अब दिल्ली आईआईटी को शोध करने के लिए कहा गया है. राजस्थान सरकार ने तीन साल पहले गोरक्षा विभाग खोलकर सभी संबंधित शोध केंद्रों पर कहा था कि वे पंचगव्य पर शोध करें. इतना ही नहीं, संभवत: इन्हीं शोधों के आधार पर पिछले दिनों राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा था कि विश्व में एक भारतीय गाय ही ऐसा प्राणी है जो सांस के रूप में ऑक्सीजन छोड़ती है!
Source: http://hindi.firstpost.com/india/cows-in-rajasthan-being-taught-bhagwat-katha-in-gujarat-branded-dalit-doneky-remark-15525.html
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