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दलित एवं आदिवासीयो को पिछले 3000 बर्षो से  भारतीय समाज व्यस्था में सबसे निचले पायेदान पर माना गया हैं। जो चतुवर्ण व्यस्था भारत में मौजूद हैं उसकी तुलना पश्चिमी देशो में होने वाले रंग भेद से की जा सकती हैं। दलित एवं आदिवासियों पर जाति आधारित अपराधो की सूची बहुत लम्बी हैं।

छुआछूत की समस्या सबसे बड़ी समस्या हैं जो आज भी भारत में रहने वाले 30 करोड़ दलितों को झेलनी पड़ रही हैं। दलित उन कुओ या नल से पानी नहीं पी सकते जिनसे ऊँची जाती के लोग पानी पीते हैं।  देश के कई भागो में तो छुआछूत की समस्या इतनी घम्भीर हैं की दलित ऊँची जाती के लोगो से नज़र भी नहीं मिला सकते , उनके सामने जूते या चप्पल नहीं पहन सकते, ऊँची जाति के व्यक्ति के सामने चारपाई पर नहीं बैठ  सकते। सादी-व्याह में संगीत बजाना तो दूर की बात हैं दूल्हा घोड़ी पर भी नहीं बैठ सकता।

आये दिन देश में दलितों के खिलाफ बिभिन्न प्रकार के अपराध एवं अत्याचारों की घटनाएं होती  हैं। दलितों एवं आदिवासियों की ज़मीन  छीनना, बंधुआ मज़दूरी, महिलाओ एवं लड़कियों के साथ बलात्कार एवं छेड़-छाड़, बच्चो को स्कूलों में प्रवेश न देना, नौकरी एवं प्रमोशन में भेदभाव। इस तरह की घटनाएं देश के लगभग सभी राज्यों होती रहती हैं।

देश सभी तरह  के मीडिया पर सवर्ण जातियों का एकाधिकार हैं  इस लिए दलितों  पर होने वाले अपराधो को मीडिया ज्यादा महत्त्व नहीं देता। इस ब्लॉग का उद्देश्य दलितों एवं आदिवासियों से सम्बंदित खबरों, तथ्यों   एवं विभिन्न पहलुओ को लोगो के सामने रखना हैं।

आप लोगो से मेरी अपील हैं की आप अपने दलित भाइयो को जागरूक करें देश में दलितों के साथ होने वाली घटनो को लोगो के साथ शेयर करें, लोगो को अपने अधिकारों के प्रीति जागरूक करें, संघटित रहे एवं अपने दलित और आदिवाशी भाइयो की मदद  करें।

  ! जय हिन्द ! जय भीम ! 

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दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

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