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दलित आरक्षण के विरोध में उतरे कुमार विश्वास


जातिगत आरक्षण की वजह से श्रेष्ठ जातियों का वर्चस्व टूट रहा है विद्यालय से लेकर विश्व विद्यालयों में अब दलित, आदिवासी, पिछड़े अध्यापक और प्रोफेसर होने लगे हैं विधायिका और कार्यपालिका में अब इनकी उपस्थिति दिखने लगी है सोशल मीड़िया ने इन्हें मुखर कर दिया है अब इनका अगला टारगेट न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में भागीदारी लेने का है. सवर्ण जातीय समुदाय वर्चस्व टूटने से चिंता बढ़ रही है और इसी लिए ही कुमार विश्वास ने जातिगत आरक्षण समाप्त करने की बात उठाई हैं !

आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास ने भी जातिगत आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि जातिगत आरक्षण को धीरे-धीरे करके खत्म कर देना चाहिए।
जातिगत आरक्षण की किया विरोध

गुजरात के अहमदाबाद में दिए अपने बयान में विश्वास ने कहा, 'हमें धीरे-धीरे जातिगत आरक्षण को खत्म कर देना चाहिए। इसकी जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की जरूरत है।'

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को पहले आरक्षण का लाभ मिल चुका है उनकी जगह दूसरे जरूरतमंदों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।



इससे पहले अहमदाबाद में ही एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कुछ इसी तरह का बयान दिया था। उन्होंने भी जातिगत आरक्षण को खत्म करने की बात कही थी।


महाजन ने कहा था, 'मुझे अब तक समझ नहीं आता की देश में जातिगत आरक्षण क्यों है? बाबा साहेब अंबेडकर ने इसे केवल 10 साल के लिए लागू करने की पैरवी की थी लेकिन राजनीतिक फायदों के लिए राजनेताओं ने संविधान में ही संशोधन कर दिया।'


उनके इस बयान का कांग्रेस ने जमकर विरोध किया। कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद तिवारी ने कहा कि जातिगत आरक्षण को खत्म करना संभव नहीं है लेकिन अगर ऐसा करने की कोशिश भी होती है तो 'हम ऐसा होने नहीं देंगे।' इसके अलावा लालू यादव ने भी कहा कि देश से जातिगत आरक्षण खत्म नहीं होगा।

Reference: http://www.amarujala.com/feature/samachar/national/kumar-vishwas-also-against-caste-based-reservation-hindi-news/

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