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राजस्थान: दलित IAS ने कबूला इस्लाम, कहा- मेरे साथ किया गया भेदभाव

राजस्थान के सीनियर आईएएस उमराव सालोदिया ने इस्लाम कबूल करते हुए नाम बदलकर उमराव खान रख लिया है. सालोदिया ने सर्विस पूरी होने से 6 महीने पहले ही रिटायरमेंट भी ले लिया है. उन्होंने सीएम वसुंधरा राजे को लेटर लिखा है. इसमें चीफ सेक्रेटरी नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जाहिर की है. गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सालोदिया ने कहा, “मेरे साथ हिंदू धर्म में भेदभाव हुआ है. मुझे चीफ सेक्रेटरी नहीं बनाया गया, दलित होने की वजह से मेरे साथ अत्याचार किए गए. इस्लाम में ऐसा नहीं होता है.”
 
“भारत के संविधान में आर्टिकल 25 (1) में नागरिकों को यह आजादी दी गई है कि वे किसी भी धर्म में अपनी आस्था जाहिर कर सकते है, मैं इसी हक के तहत आज 31 दिसंबर, 2015 को हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना रहा हूं.” मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लिखे पत्र में उन्होंने कहा की “मैं एससी/एसटी कोटा से आईएएस हूं, जिसे सीनियरिटी की बुनियाद पर चीफ सेक्रेटरी बनाया जाना चाहिए था. लेकिन मौजूदा चीफ सेक्रेटरी सी.एस. राजन को 31 मार्च, 2016 तक 3 महीने का एक्सटेंशन दिया गया है. राजन को दिए गए एक्सटेंशन के कारण मुझे सीएस बनने का मौका नहीं मिला. अगर एक्सटेंशन नहीं दिया जाता तो सीनियरिटी के हिसाब से मुझे ही सीएस बनाया जाता. यह सब राज्य सरकार के कहने पर हुआ है. इन सब बातों के चलते मैं वीआरएस के लिए सरकार से गुजारिश करता हूं.”

राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा, “चीफ सेक्रेटरी राजन को तीन महीने का एक्सटेंशन रूल्स के तहत दिया गया है. राजन सीनियर आईएएस हैं. कई पोस्ट पर रहते हुए उन्होंने अपनी काबिलियत दिखाई है. सालोदिया की सर्विस केवल 6 महीने बाकी थी. अगर वे 31 मार्च तक इंतजार करते तो शायद उनके लिए रास्ते खुले होते. इतने सीनियर होते हुए भी सालोदिया ने इस तरह के आरोप लगाए हैं, यह बेहद शर्मनाक है. धर्म बदलना उनका निजी मामला हो सकता है, लेकिन मैं ऐसे आरोपों की निंदा करता हूं.
राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा, “यह तरीका गलत था, किसी भी धर्म को कोई भी माने, उसकी मनाही नहीं है. कटारिया के मुताबिक, सालोदिया जैसे पढ़े-लिखे आदमी को यह शोभा नहीं देता है. ड‌्यूटी में 6 महीने ही बचे हैं, ऐसे में यह फैसला ठीक नहीं है.
1978 बैच के आईएएस सालोदिया जयपुर के ही रहने वाले हैं, वे राजस्थान रोडवेज के चेयरमैन हैं. इससे पहले वे जवाहर कला केंद्र के डायरेक्टर के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट में भी एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रहे हैं.

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