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फिर एक बार दलित होने के कारण घोड़ी पर नहीं बैठ सका दूल्हा

राजस्थान में पाली के खिमाड़ा गांव की CISF कांस्टेबल नीतू भार्गव की शादी में उसके पति को दलित होने के कारण घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया गया। शुक्रवार (15/01/2016) को हुई इस शादी में समाज के लोगों के प्रशासन से आग्रह के बाद भी गांव की वर्षों पुरानी सामाजिक रूढ़िवादी परंपराएं नहीं खत्म हो पाईं।
नीतू की इच्‍छा थी कि उसकी शादी में बिंदौली बैंड बाजों के साथ निकले, दूल्हा घोड़ी पर बैठकर तोरण मारे और प्रशासन का आशीर्वाद मिले, लेकिन पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद ऐसा नहीं हो सका।
शुक्रवार सुबह सात बजे ही नीतू का दूल्हा प्रवीण भार्गव बारात लेकर खिमाड़ा गांव पहुंच गया। प्रशासन ने घोड़ी भी मंगवा ली थी लेकिन उदयपुर, भरतपुर, झुंझुनू, जयपुर और कोटा से आए समाज के लोगों व कुछ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसका विरोध करते हुए रोष जताया। साथ ही उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रशासन के इस रवैये की निंदा की, जिस कारण दूल्हा घोड़ी पर नहीं चढ़ पाया।
शादी की रस्म के बाद समाज के लोगों का झेलना पड़ा विरोध
सामाजिक रीति रिवाजों को ध्यान में रखते हुए दुल्हन नीतू, दूल्हा प्रवीण भार्गव बिना बैंड-बाजों और घोड़ी के विवाहस्थल पहुंचे और तोरण की रस्म पूरी की। तोरण की रस्म के बाद दोनों का विवाह किया गया। तोरण की रस्म के बाद प्रशासन ने घोड़ी मंगा ली। इस पर समाज के लोगों ने विरोध और नारेबाजी की तो दूल्हा, दुल्हन सहित पूरा सरकारी अमला दवाब में आ गया।

प्रशासन पर घोड़ी देरी से मंगाने का आरोप
इस मामले को लेकर प्रदेश के कई जिलों से पहुंचे समाज के लोगों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रकट करते हुए कहा कि तोरण की रस्म पूरी होने के बाद घोड़ी पहुंची। जानबूझकर घोड़ी देरी से मंगाई, प्रशासन खुद इस मामले को लेकर दबाव में था।

शादी की रस्म पूरी होने तक पुलिस-प्रशासन रहा तैनात
सीआईएसएफ की जवान नीतू मेघवाल की शादी को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए गए थे। इस पर दो दिन तक गांव में पुलिस जाप्ता तैनात रहा। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी सहित पुलिस प्रशासन के अधिकारी शादी की रस्म पूरी होने तक वहां मौजूद थे।

किसी भी तरह का नहीं था दबाव, हम तैयार थे
इस मामले को लेकर खिमाड़ा राणावत ग्राम पंचायत के उपसरपंच महेंद्रसिंह राणावत का कहना था कि बिंदौली से लेकर शादी की रस्म पूरी होने तक हम लोग मौजूद थे।
दुल्हन की बिंदौली, दूल्हे के तोरण की रस्म घोड़ी पर करवाने के लिए काफी प्रयास भी किए गए, लेकिन दोनों राजी नहीं हुए। राणावत का यह भी कहना था कि गांव में पूर्व में भी दलित परिवारों के कई विवाह समारोह में घोड़ी बैंड-बाजे के साथ तोरण की रस्म बिंदौली निकाली गई है। किसी भी तरह से कोई विरोध नहीं हुआ था। इस बार भी हमने प्रयास किए।

भाई ने कहा-दबाव में आया प्रशासन
इधर, इस पूरे मामले पर नीतू की बुआ के बेटे लक्ष्मणसिंह ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर प्रशासन खुद दबाव में था। उसका कहना था कि रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ने के लिए किसी ने भी पहल नहीं की। इसके साथ ही शादी के दो दिन पूर्व परिवार पर दबाव बनाकर सांडेराव थाने की ओर से यह लिखवाया गया था कि हमें किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं चाहिए।

बरात लेकर आया दूल्‍हा।

यह है मामला
पाली के खिमाड़ा गांव निवासी सीआईएसएफ में कार्यरत दलित परिवार की नीतू के बुआ के बेटे लक्ष्मण सरियाला ने सीएम वसुंधरा राजे को पत्र लिखकर शुक्रवार को नीतू की शादी में बैंड-बाजों घोड़ी पर बैठ तोरण की रस्म अदा करने की बात करते हुए प्रशासन से सुरक्षा मांगी थी। गांव में सुरक्षा से इंतजाम करने की मांग की थी।
इस पर राष्ट्रीय एससी आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे हालांकि नीतू और उसके पिता ने पहले ही पुलिस-प्रशासन को यह लिख दिया था कि वे सामाजिक परंपरा के अनुसार ही शादी की रस्में पूरी करेंगे।

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