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दलितो के साथ होने वाले अपराधो को क्यों तवज्जो नहीं देता मीडिया??

देश में सबसे ज्यादा अपराध दलितों के खिलाफ होते हैं। कभी दलितों को मन्दिर में जाने के कारण उस के सर कुल्हाड़ी से बार करके उसे ज़िन्दा जला दिया जाता है तो कभी किसी दलित बच्चे की पिटाई इस लिए करदी जाती हैं क्योंकि उसने मिड-डे  मील की थाली को हाथ लगा दिया था। मध्य प्रदेश में तो एक दलित लड़की की पिटाई सिर्फ इसलिए करदी थी क्योंकि उसकी छाया  ऊँची जाती के व्यक्ति के खाने पर पड़ गयी थी। में अपने इस ब्लॉग पर ऐसी कई घटनाओ को उल्लेख कर चूका हूँ।  

दुःख की वात यह हैं की दलितों पर होने वाले इन अत्याचारों को देश के मीडिया में वो जगह नहीं मिलती जो वाकी चटपटी खबरों को मिलती हैं।अभी उत्तर प्रदेश में एक घटना घटित हुई है गौतम बुद्ध नगर के तहसील दादरी  के गाँव बिसाहडा में एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या करदी थी। वह मामला देश के मीडिया में छाया रहा। इसी के चलते उत्तर प्रदेश के मुख्य मन्त्री अखिलेश सिंह यादव जी ने न्याय दिलाने व चालीस लाख की धन राशी देने का बादा किया है और  सभी राजनैतिक पार्टीयो के नेता उनसे मिलने जा रहे है। मीडिया के कवरेज की वजह से शायद इस व्यक्ति को न्याय मिल जाये।

यूपी में ही कुछ दिन पूर्व एक 90 साल के दलित बुजुर्ग को जिंदा जलाने का मामला सामने आया था। बुजुर्ग को सिर्फ इसलिए जला दिया गया क्योंकि वह मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। यह बात ना तो मिडिया ने दिखाई और ना ही राजनैतिक पार्टियो ने इसे ज्यादा तवज़्ज़ो दी क्योंकि मरने वाला दलित व्यक्ति था तथा इस मामले से देश के मीडिया को इतनी TRP नहीं मिलती। इसी तरह 2 अक्टूबर को जयपुर में दलित-आदिवासियों की आरक्षण के समर्थन में एक विशाल रैली थी जिसमें 5 लाख से भी अधिक लोगो ने हिस्सा लिया था लेकिन देश के किसी भी न्यूज़ चैनल ने इसे नहीं दिखाया।  

मीडिया दलितों पर होने वाले अत्याचारों को क्यों अनदेखा करता हैं इसके कारणों पर विचार करना ज़रूरी हैं। सबसे पहला कारण हैं देश के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दलितों और आदिवासियों का प्रितिनिधित्व निहायत ही काम हैं। देश के प्रमुख न्यूज़ चैनेलो में शायद ही कोई दलित या आदिवासी रिपोर्टर की पोस्ट पर होगा। सभी न्यूज़ चैनल देश के बड़े ओद्योगिक घरानो द्वारा चलाये जाते हैं जिन्होंने इनमें सवर्णो को भर रखा हैं। यही कारण हैं की मीडिया दलितों को कोई तवज़्ज़ो नहीं देता। दूसरा कारण हैं देश के मीडिया की ग्रामीण इलाको में पहुँच न के वाराबर हैं और दलित मुख्यत  ग्रामीण इलाको में ही रहते हैं।

लेकिन सूचना तकनीकी में आई क्रांति ने दलितो पर होने वाले अत्याचारो के दुनिया के सामने लाना शुरू कर दिया हैं। Social मीडिया के विभिन्न रूप जैसे facebook, Whatsapp, twitter आदि ने हरेक व्यक्ति को पत्रकार बना दिया हैं। लोग अपने साथ होने वाले अत्याचारो को इन के माध्यम से समाज के सामने रख रहे हैं।  

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