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खान माफिया हथिया रहे दलितों की बेशकीमती जमीन

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया खनन क्षेत्र में सैण्डस्टोन के रूप में सोना निकल रहा है। इसके लिए करोड़ों की बेशकीमती जमीनों को क्षेत्र के भूमि व खान माफिया कोडियों के दाम खरीद रहे हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए दलितों की जमीन को फर्जी तरीके से हथिया कर खनिज विभाग के अधिकारियों व ग्रामदानी कारिंदों की मिलीभगत से खातेदारी भूमि पर खान के एग्रीमेंट किए गए।

बिजौलिया उपखण्ड के ग्रामदानी गांव काटबड़ा के निरक्षर और गरीब भील जाति के लोग करोड़ों की जमीनों के मालिक होते हुए भी फटे हाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं, वहीं इनकी जमीनों को हथिया कर भूमाफिया, सरकार एवं ग्रामदान बोर्ड के कारिंदे करोड़पति होते जा रहे हैं। क्षेत्र की 25 बीघा खातेदारी भूमि के एग्रीमेंट की बाजार कीमत लगभग 7.10 करोड़ रूपए तक आंकी जाती है।

खातेदारी भूमि के एग्रीमेंट के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं व भ्रष्टाचार हुए। ग्रामदानी गांव काटबड़ा में एक क्वारी लाइसेंस के लिए 25 बीघा खातेदारी भूमि के एग्रीमेंट मामले में खनिज विभाग व ग्रामदानी पटवारी ने उच्चतम न्यायालय के उस आदेश की अवहेलना की है, जिसके तहत खनन क्षेत्र का नदी, नाला, आबादी, विद्यालय, सड़क व हाईटेंशन लाइनों से 45 मीटर दूर होना आवश्यक है। एग्रीमेंट में ऎरू नदी से सटी आराजी भी शामिल हैं, जो गांव के नक्शे व जमाबंदी में दर्ज है। इसके बावजूद खनिज विभाग ने एग्रीमेंट मान लिया।

इसी तरह की अनियमितताएं एक अन्य एग्रीमेंट में भी सामने आई है। इसमें एनीकट भूमि ही खातेदारी में दे दी गई। सिंचाई व राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज सिंचाई नहरों को नजर अंदाज कर एग्रीमेंट किए गए। खननकर्ताओं द्वारा नहरों को तोड़ कर बरसो से खनन करना जारी है। ग्रामदानी का मामला कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर ने 2014 को विधानसभा में भी उठाया था, लेकिन इस मामले की जांच तक नहीं हो सकी।

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