सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

उत्तर प्रदेश में दबंगों ने दलित युवक की जीभ काटी

उत्तर प्रदेश में दबंगों का कहर बढ़ता जा रहा है और पुलिस का खौफ खत्म हो गया है। पुलिस अब सिर्फ रिपोर्ट लिखने तक सीमित रह गई है। इसका जीवन्त उदाहरण है जिला जौनपुर में हुई एक घटना। जिसमें ग्राम गरियांव के एक दलित युवक पर दबंगों ने अपनी ताकत का रौब झाडऩे के लिए उसकी जीभ काट दी।

तूफानी मुसहर गाँव गरियाव, थाना मुंगरा बादशाहपुर जिला जौनपुर का रहने वाला है। वह उसी जाति का सदस्य है जिसे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार महादलित कहते हैं।  कहीं कहीं उन्हें आदिवासी भी माना जाता है।  गाँव के बाहर झोंपड़ी बनाकर रहने वाले उत्तर प्रदेश के मुसहर अमूमन खेत मज़दूरी , लकड़ी काटकर और दोना-पत्तल बनाकर अपनी आजीविका चलाते हैं।  अभी तक उनमें शिक्षा की बहुत थोड़ी रोशनी आ पाई है।

  
तूफानी और उसका भाई भी थोडा बहुत पढ़ पाए लेकिन गरीबी ने उन्हें जल्दी ही खटकर खाने पर मजबूर कर दिया। लिहाज़ा बहुत दिनों तक बेलदारी करते-करते तूफानी एक दिन राजमिस्त्री बन गया और आसपास के इलाकों में मकान बनाकर वह अपनी रोटी कमाने लगा। पिछले दिनों उसी के गाँव गरियाव के निवासी संतोष कुमार शुक्ला उर्फ़ पप्पू ने उससे अपने मकान में पलस्तर लगवाया और कुछ समय बाद मज़दूरी देने का वादा किया लेकिन जब तूफानी ने वादे के मुताबिक अपना बकाया मेहनताना माँगा तो संतोष हीलाहवाली करने लगा। फिर भी अपनी जायज़ बकाया मज़दूरी के लिए तूफानी ने बार-बार तगादा जारी रखा। वह जब भी अपना रुपया मांगता तब-तब संतोष आनाकानी करता।  होते-होते एक दिन इसी मसले को लेकर दोनों में कहासुनी हो गई। उस समय संतोष ने तूफानी को धमकाया कि दुबारा पैसा मत मांगना नहीं तो अच्छा नहीं होगा।

अब तूफानी को लगने लगा कि उसका रूपया डूब गया। धमकी और संतोष की आर्थिक और जातीय हैसियत को देखते हुए वह चुप लगा गया और फिर कभी पैसे नहीं मांगे। लेकिन संतोष के मन में यह कुंठा बनी रह गई कि एक मुसहर ने उससे पैसे के लिए कहासुनी कर ली। उसे यह भी लगता कि तूफानी भले चुप रह गया हो लेकिन कभी न कभी तो वह फिर अपना पैसा मांगेगा ही।


पांच सितम्बर 2015 को रात में करीब 9 बजे संतोष तूफानी के घर मोटर साइकिल से आया और कहने लगा कि तूफानी सारी बीती बातें ख़त्म करो। आओ चलो तुमको जन्माष्टमी का मेला दिखाकर लाता हूँ। वापसी में तुम्हारे पैसे भी दे दूंगा। इसपर तूफानी को लगा कि इससे अच्छी क्या बात होगी कि उसकी बकाया मज़दूरी भी मिल जाये और आपसी मनमुटाव भी दूर हो जाये। इसलिए तूफानी बहुत भरोसे के साथ संतोष के साथ चला गया।


रात को एक बजे जन्माष्टमी का मेला देखने के बाद जब तूफानी संतोष की मोटर सायकिल से वापस घर आ रहा था तो रास्ते में नहर की पुलिया के पास संतोष के साथी पुट्टन सरोज और पप्पू सरोज पहले से मौजूद मिले।  संतोष ने मोटर सायकिल वहीँ रोक दी। फिर तीनों अचानक तूफानी को जातिसूचक गालियाँ देने लगे। उन्होंने कहा – साले मुसहर तेरी इतनी औकात हो गई है कि तुम हमलोगों से तगादा करने लगे हो। बहुत चलती है तुम्हारी जबान न। आज इसे ही काट देते हैं फिर कभी न चलेगी। इसके बाद तीनों उसे ज़मीन पर गिराकर लात-घूंसों से मारने लगे। फिर पुट्टन और पप्पू ने तूफानी को पकड़ लिया और संतोष ने रिवाल्वर निकालकर धमकाया –अगर चिल्लाये तो जान से मार दूंगा।  फिर संतोष ने एक छोटा सा चाकू निकाला और तुफानी की जीभ को बीच से फाड़ दिया। तीनों ने मारकर उसके कई दांत भी तोड़ दिए। जब तूफानी की चीख-पुकार सुनकर जन्माष्टमी का मेला देखकर लौटने वाले कुछ लोग उसे बचाने दौड़े तो तीनों उसे छोड़कर भाग गए लेकिन रिवाल्वर दिखाते हुए धमकाते भी गए कि यदि पुलिस को सूचना दिए तो जान से मार देंगे। 


 यह भी पढ़ें:- 
1.   UP में खाप पंचायत का आदेश, बदला लेने के लिए दलित बहनो का बलात्कार करो
2.   मजदूरी मांगने गई दलि‍त सास-बहू को दबंग ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
3.   इटावा में अंतरजातीय प्रेम-प्रसंग के चक्कर में दबंगों ने की दलित पिता-पुत्र की हत्या

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"अम्बेडकरवाद" क्या है ?

आज जिसे देखो वहीं, कहता नज़र आता है कि "मैं अम्बेडकरवादी हूँ"। लेकिन क्या उसे ये पता होता है की "अम्बेडकरवाद" है क्या? किसी किसी को शायद ये बड़ी मुश्किल से पता होता है कि "अम्बेडकरवाद" असल में है क्या? अम्बेडकरवाद" किसी भी धर्म, जाति, रूढ़वादिता, अंधविश्वास, अज्ञानता,किसी भी प्रकार के भेदभाव या रंगभेद को नहीं मानता, अम्बेडकरवाद मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानवता के लिए बनाने का नाम है। अम्बेडकरवाद वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों के नाम है। एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब मानव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना कर समाज और मानव हित में कार्य किया जाये।सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाकर जीवन जीना अम्बेडकरवाद नहीं है।आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है.... परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वो लोग छोड़ने को तैयार ही नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उद्धार हो पाया है? ........ अगर ऐसा होता तो शायद अम्बेडकरवाद का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से

दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

2011 के जनसंख्या आकड़ो के हिसाब से देश में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 16.6% हैं। तथा अनुमानत: 2015 तक अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या 217460000 (21.74 कऱोड़) हैं। आप हमेशा सोचते होंगे की देश के किस राज्य में देश की सबसे अधिक दलित आवादी निवास करती हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य नीचे सारणी में दिखाये गए हैं तथा उन राज्यों में लगभग कितनी दलित जनसंख्या हैं वो भी लिखी हुई हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य   Rank राज्य  % दलित आबादी   दलित आबादी 1 उत्तर प्रदेश 20.5  % 44579300 2 पश्चिम बंगाल 10.7  % 23268220  3 बिहार 8.2  % 17831720  4 तमिलनाडु 7.2  % 15657120  5 आंध्र प्रदेश 6.9  % 15004740  6 महाराष्ट्र 6.6  % 14352360  7 राजस्थान 6.1  % 13265060  8 मध्य प्रदेश 5.6  % 12177760  9 कर्नाटक 5.2  % 1130792

अर्ध सैनिक बलों नें आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ कर जांच करी कि यह लडकियां शादी शुदा हैं या नहीं

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास नामके गाँव में 12 जनवरी 2016 की यह घटना है।  संयुक्त सैन्य बलों नें पेद्दरास गाँव में जाकर हमला किया।  सुरक्षा बलों से सरकार नें कहा हुआ है कि अगर गांव में कोई भी आदिवासी युवा लड़की अविवाहित मिलती है तो उसे नक्सली मान लिया जाय क्योंकि नक्सली लडकियां शादी नहीं करती हैं।  इसलिए आजकल बस्तर में सिपाही आदिवासी लड़कियों को जब पकड़ते हैं तो आदिवासी लडकियां सिपाहियों से कहती हैं कि हमें मत मारो हम शादी शुदा हैं। सिपाही लड़कियों से शादी शुदा होने के प्रमाण के रूप में उनके स्तनों में दूध होने का प्रमाण दिखाने के लिए कहते हैं। अधिकतर मामलों में सिपाही खुद ही आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ते हैं छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास गाँव में विवेकानंद जयंती अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के दिन आदिवासी युवा लड़कियों पर सरकार के सिपाहियों नें हमला किया। सिपाहियों नें एक महिला का हाथ भी तोड़ दिया है। सिपाहियों नें गाँव की आदिवासी लड़कियों पर नक्सली होने का इलज़ाम लगाया लड़कियों नें कहा कि हमारी शादी हो चुकी है इस पर सिपाहियों नें लड़कियों से कहा कि सबूत दो कि तु