सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गुजरात में दलित महिलाओं के साथ रेप 5 गुणा बढ़े

देश में गुजरात के विकाश मॉडल की दुहाई दी जाती हैं और इसी को आधार बना कर श्री नरेंद्र मोदी देश के प्रधान मंत्री बन गए हैं। लेकिन गुजरात में वर्ष 2001 से 2014 के बीच दलित महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों में पांच गुना वृद्धि हुई है जो गुजरात के विकास मॉडल की पोल खोलते हैं। इसमें ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों के ऐसे मामले शामिल नहीं है जिनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करायी गयी है। यह वही समयांतराल हैं जिसमें नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्या मंत्री थे। 
 
उत्तर गुजरात के महेसाणा निवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता कौशिक परमार को सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कार्यालय से मुहैया करायी गयी जानकारी में कहा गया है कि वर्ष 2001 में दलित महिलाओं से दुष्कर्म के केवल 14 मामले दर्ज किये गये थे जबकि 2014 तक यह संख्या बढ कर 74 हो गयी।

डीजीपी कार्यालय से दी गयी सूचना में कहा गया है कि जनवरी 2001 से दिसंबर 2014 के बीच गुजरात में दुष्कर्म के कुल 501 मामले दर्ज कराये गये थे।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार ने पिछले साल ही अहमदाबाद, सूरत और गांधीनगर की महिलाओं की सुरक्षा के लिए अभयम के नाम से पुलिस की विशेष हेल्पलाइन नंबर 181 की शुरूआत की थी। इस नंबर पर पिछले एक साल में इन तीन शहरों से करीब 17000 महिलाओं ने सहायता कॉल किये । मुख्यमंत्री श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने पिछले माह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस सेवा को पूरे राज्य में विस्तारित करने की घोषणा की थी।
http://news.webindia123.com/

यह भी पढ़ें:-

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"अम्बेडकरवाद" क्या है ?

आज जिसे देखो वहीं, कहता नज़र आता है कि "मैं अम्बेडकरवादी हूँ"। लेकिन क्या उसे ये पता होता है की "अम्बेडकरवाद" है क्या? किसी किसी को शायद ये बड़ी मुश्किल से पता होता है कि "अम्बेडकरवाद" असल में है क्या? अम्बेडकरवाद" किसी भी धर्म, जाति, रूढ़वादिता, अंधविश्वास, अज्ञानता,किसी भी प्रकार के भेदभाव या रंगभेद को नहीं मानता, अम्बेडकरवाद मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानवता के लिए बनाने का नाम है। अम्बेडकरवाद वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों के नाम है। एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब मानव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना कर समाज और मानव हित में कार्य किया जाये।सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाकर जीवन जीना अम्बेडकरवाद नहीं है।आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है.... परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वो लोग छोड़ने को तैयार ही नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उद्धार हो पाया है? ........ अगर ऐसा होता तो शायद अम्बेडकरवाद का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से

दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

2011 के जनसंख्या आकड़ो के हिसाब से देश में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 16.6% हैं। तथा अनुमानत: 2015 तक अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या 217460000 (21.74 कऱोड़) हैं। आप हमेशा सोचते होंगे की देश के किस राज्य में देश की सबसे अधिक दलित आवादी निवास करती हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य नीचे सारणी में दिखाये गए हैं तथा उन राज्यों में लगभग कितनी दलित जनसंख्या हैं वो भी लिखी हुई हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य   Rank राज्य  % दलित आबादी   दलित आबादी 1 उत्तर प्रदेश 20.5  % 44579300 2 पश्चिम बंगाल 10.7  % 23268220  3 बिहार 8.2  % 17831720  4 तमिलनाडु 7.2  % 15657120  5 आंध्र प्रदेश 6.9  % 15004740  6 महाराष्ट्र 6.6  % 14352360  7 राजस्थान 6.1  % 13265060  8 मध्य प्रदेश 5.6  % 12177760  9 कर्नाटक 5.2  % 1130792

अर्ध सैनिक बलों नें आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ कर जांच करी कि यह लडकियां शादी शुदा हैं या नहीं

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास नामके गाँव में 12 जनवरी 2016 की यह घटना है।  संयुक्त सैन्य बलों नें पेद्दरास गाँव में जाकर हमला किया।  सुरक्षा बलों से सरकार नें कहा हुआ है कि अगर गांव में कोई भी आदिवासी युवा लड़की अविवाहित मिलती है तो उसे नक्सली मान लिया जाय क्योंकि नक्सली लडकियां शादी नहीं करती हैं।  इसलिए आजकल बस्तर में सिपाही आदिवासी लड़कियों को जब पकड़ते हैं तो आदिवासी लडकियां सिपाहियों से कहती हैं कि हमें मत मारो हम शादी शुदा हैं। सिपाही लड़कियों से शादी शुदा होने के प्रमाण के रूप में उनके स्तनों में दूध होने का प्रमाण दिखाने के लिए कहते हैं। अधिकतर मामलों में सिपाही खुद ही आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ते हैं छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास गाँव में विवेकानंद जयंती अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के दिन आदिवासी युवा लड़कियों पर सरकार के सिपाहियों नें हमला किया। सिपाहियों नें एक महिला का हाथ भी तोड़ दिया है। सिपाहियों नें गाँव की आदिवासी लड़कियों पर नक्सली होने का इलज़ाम लगाया लड़कियों नें कहा कि हमारी शादी हो चुकी है इस पर सिपाहियों नें लड़कियों से कहा कि सबूत दो कि तु