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यहां घुट-घुट कर जिंदगी जीते हैं दलित, बर्तन छू लेने पर चुकानी पड़ती है कीमत

बुंदेलखंड के दलितों की जिंदगी बदहाल है। आजादी के 60 दशक बीत जाने के बाद भी वे घुट-घुट कर जीने के लिए मजबूर हैं। गांव के उच्च जाति के इनपर अत्याचार करते हैं। उनके घरों के सामने से वे नहीं गुजर सकते। उच्च जाति के लोगों से बात करने से पहले उन्हें अपनी पगड़ी उतारनी पड़ती है। यदि कोई दलित उच्च वर्ग के व्यक्ति के सामने गलती से चारपाई पर बैठ गया, तो उसकी टांगे तोड़ दी जाती है। यही नहीं, दलित ने यदि उनका बर्तन छू लिया, तो उन्हें उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
बुंदेलखंड में हाल के दिनों में दलितों पर अत्याचार के कई मामले सामने आए हैं। बीते शनिवार को कुछ दबंगों ने कथित तौर पर दो मजदूरों के साथ दरिंदगी की। उनकी गलती बस इतनी थी कि इन्होंने अपनी देहाड़ी मांगी थी। दंबगों ने इससे नाराज होकर उनके साथ मारपीट की। उनके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल और पशुओं को देने वाला इंजेक्शन लगाया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इसके पहले झांसी के खैरा गांव में भी एक दलित युवक के साथ अत्याचार का मामला सामने आया था। यहां बीते 19 सितंबर को एक प्लॉट को लेकर हुए विवाद में उच्च जाति के कुछ दबंग लोगों ने उसे यातनाएं दीं। युवक को जबरन पेशाब पिलाया गया और मल चटाया गया। उसका सिर मुंडवा दिया गया। आधी मूंछ भी काट दी गई। उसकी जमकर पिटाई की गई। इतना ही नहीं, दबंगों ने उसके प्राइवेट पार्ट में कपड़ा बांधकर पेट्रोल डालकर आग लगा दिया।

इस तरह दलितों के साथ हो रहे अत्याचार और दरिंदगी की वारदातों से झांसी चर्चा में आ गई। ऐसे में dainikbhaskar.com की टीम ने दलित बहुल गांवों का जायजा लिया। इस दौरान हमने कुछ लोगों से बात की और हकीकत को जाना। इसमें हैरान करने वाले कई तथ्य सामने आए।

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दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

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