सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

दबंग ने घर में घुस कर दलित किशोरियों से दुष्कर्म का प्रयास किया

इलाहाबाद के मीरगंज इलाके में एक शोहदे ने दुस्साहस की हद कर दी। स्कूल जाते समय दलित किशोरियों से छेड़छाड़ करता रहा। जब उसके परिजनों से शिकायत की गई तो किशोरी के घर आ धमका। दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध पर मारपीट की। दोनों बहनों के कपड़े फाड़ दिए। शोर मचाने पर पड़ोसियों के आ जाने के डर से भाग गया। पुलिस ने उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करके तलाश शुरू कर दी है।

गांव गहवरा निवासी दो सगी दलित बहनों ने थाने में तहरीर देकर बताया कि दोनों दिवना गाव में संचालित एक निजी स्कूल में पढ़ती हैं। प्रतिदिन वे घर से स्कूल आती और जाती हैं। गाव का राजू सिंह अक्सर रास्ते में घेर कर अश्लील हरकतें करता है। कई बार इसकी शिकायत आरोपी के बुजुगरें से की गई लेकिन वह उसके बाद भी नहीं माना। 

सात अगस्त को लगभग शाम चार बजे दोनों बहनें घर में थीं उनकी मां पड़ोस के घर में काम से गई थीं। इसी दौरान राजू सिंह घर में घुस आया और एक बहन का हाथ पकड़कर उसके साथ अश्लील हरकतें कीं और दुष्कर्म का प्रयास किया। किशोरी के शोर मचाने पर उसे बचाने पहुंची उसकी बहन के साथ भी शोहदे ने जोर जबदस्ती की। विरोध पर दोनों बहनों के साथ मारपीट की और कपड़े फाड़ डाले। शोर मचाने पर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गया। पुलिस ने बताया कि राजू सिंह के खिलाफ छेड़छाड़, मारपीट एवं पॉक्सो एक्ट तहत अभियोग दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तारी के लिए उसकी तलाश की जा रही है।

यह भी पढ़ें :-

  1. इटावा में अंतरजातीय प्रेम-प्रसंग के चक्कर में दबंगों ने की दलित पिता-पुत्र की हत्या
  2. स्कूल में लगे नल से पानी पीने पर प्रधानाचार्य ने दलित छात्र को बेरहमी से पीटा
  3. दलित लड़की से बलात्कार की कोसिस के बाद गोली मारकर हत्या
  4. मथुरा के एक गाँव में 20 दलित परिवार 4 दिन से अपने घर नहीं जा पा रहे हैं!
  5. दबंगो ने बाइक न देने पर दलित को घर में घुस कर पीटा

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"अम्बेडकरवाद" क्या है ?

आज जिसे देखो वहीं, कहता नज़र आता है कि "मैं अम्बेडकरवादी हूँ"। लेकिन क्या उसे ये पता होता है की "अम्बेडकरवाद" है क्या? किसी किसी को शायद ये बड़ी मुश्किल से पता होता है कि "अम्बेडकरवाद" असल में है क्या? अम्बेडकरवाद" किसी भी धर्म, जाति, रूढ़वादिता, अंधविश्वास, अज्ञानता,किसी भी प्रकार के भेदभाव या रंगभेद को नहीं मानता, अम्बेडकरवाद मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानवता के लिए बनाने का नाम है। अम्बेडकरवाद वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों के नाम है। एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब मानव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना कर समाज और मानव हित में कार्य किया जाये।सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाकर जीवन जीना अम्बेडकरवाद नहीं है।आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है.... परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वो लोग छोड़ने को तैयार ही नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उद्धार हो पाया है? ........ अगर ऐसा होता तो शायद अम्बेडकरवाद का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से

दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

2011 के जनसंख्या आकड़ो के हिसाब से देश में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 16.6% हैं। तथा अनुमानत: 2015 तक अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या 217460000 (21.74 कऱोड़) हैं। आप हमेशा सोचते होंगे की देश के किस राज्य में देश की सबसे अधिक दलित आवादी निवास करती हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य नीचे सारणी में दिखाये गए हैं तथा उन राज्यों में लगभग कितनी दलित जनसंख्या हैं वो भी लिखी हुई हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य   Rank राज्य  % दलित आबादी   दलित आबादी 1 उत्तर प्रदेश 20.5  % 44579300 2 पश्चिम बंगाल 10.7  % 23268220  3 बिहार 8.2  % 17831720  4 तमिलनाडु 7.2  % 15657120  5 आंध्र प्रदेश 6.9  % 15004740  6 महाराष्ट्र 6.6  % 14352360  7 राजस्थान 6.1  % 13265060  8 मध्य प्रदेश 5.6  % 12177760  9 कर्नाटक 5.2  % 1130792

अर्ध सैनिक बलों नें आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ कर जांच करी कि यह लडकियां शादी शुदा हैं या नहीं

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास नामके गाँव में 12 जनवरी 2016 की यह घटना है।  संयुक्त सैन्य बलों नें पेद्दरास गाँव में जाकर हमला किया।  सुरक्षा बलों से सरकार नें कहा हुआ है कि अगर गांव में कोई भी आदिवासी युवा लड़की अविवाहित मिलती है तो उसे नक्सली मान लिया जाय क्योंकि नक्सली लडकियां शादी नहीं करती हैं।  इसलिए आजकल बस्तर में सिपाही आदिवासी लड़कियों को जब पकड़ते हैं तो आदिवासी लडकियां सिपाहियों से कहती हैं कि हमें मत मारो हम शादी शुदा हैं। सिपाही लड़कियों से शादी शुदा होने के प्रमाण के रूप में उनके स्तनों में दूध होने का प्रमाण दिखाने के लिए कहते हैं। अधिकतर मामलों में सिपाही खुद ही आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ते हैं छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास गाँव में विवेकानंद जयंती अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के दिन आदिवासी युवा लड़कियों पर सरकार के सिपाहियों नें हमला किया। सिपाहियों नें एक महिला का हाथ भी तोड़ दिया है। सिपाहियों नें गाँव की आदिवासी लड़कियों पर नक्सली होने का इलज़ाम लगाया लड़कियों नें कहा कि हमारी शादी हो चुकी है इस पर सिपाहियों नें लड़कियों से कहा कि सबूत दो कि तु