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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नहीं होने दिया बामसेफ का अधिवेशन

देश आज़ादी की 69वीं बर्षगांठ माना रहा था लेकिन दलित संगठन बामसेफ को एक अधिवेशन करने की भी आज़ादी नहीं हैं। हरियाणा के रोहतक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की अगुआई में भारी हंगामे के चलते महऋषि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी में बामसेपफ का अधिवेशन नहीं हो सका। शनिवार (15/08/2015) सुबह बामसेफ के कार्यकर्ताओं को आंबेडकर हॉल में बंद कर दिया। दोनों पक्षों में मारपीट भी हुई। 
दलितों के मशहूर वैचारिक संगठन बामसेफ का दिन का हरियाणा राज्य अधिवेशन महऋषि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी के आंबेडकर हॉल में शनिवार सुबह शुरू होना था। ए.बी.वी.पी एमडीयू में इस अधिवेशन को नहीं होने देने पर आमादा थी। एबीवीपी नेताओं के मुताबिक, शुक्रवार को उन्होंने घोषणा कर दी थी कि यूनिवर्सिटी केम्पस में इस अधिवेशन को नहीं होने दिया जाएगा। एबीवीपी के मुताबिक, बामसेफ एक धर्म के खिलाफ आवाज बुलंद करता है और जातिवाद को बढ़ावा देता है। गौरतलब है कि मनुवाद और ब्राह्मणवाद का विरोध करने वाल बामसेफ वैचारिक रूप से एबीवीपी और उसके फादर ऑर्गेनाइजेशन आर.एस.एस के खिलाफ पड़ता है। बामसेफ को बीएसपी का थिंक टैंक भी माना जाता है।

दिलचस्प यह रहा कि इस मुहिम में एबीवीपी अपने साथ दलित छात्रों के संगठन आंबेडकर मिशनरी विद्यार्थी असोसिएशन को भी शामिल कर रखा था। बामसेफ के हरियाणा राज्य के महासचिव संधीर बौद्ध के मुताबिक, वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ आंबेडकर हॉल में बैनर लगा रहे थे तो एबीवीपी के कार्यकर्ताओं व उनके साथ आए दूसरे लोगों ने बाहर से हॉल में ताला लगा दिया। दोनों ओर से नारेबाजी भी हुई। संधीर के मुताबिक, महिलाओं और बच्चों समेत कई लोगों को चोट भी लगी है। 

बाद में यह अधिवेशन सुखपुरा चौक पर अंबेडकर पब्लिक स्कूल में शुरू किया गया। संधीर बौद्ध ने आरोप लगाया कि पूर्व में अनुमति होने के बावजूद बामसेफ के अधिवेशन को जबरन रोकने में प्रदेश की सरकार की भूमिका रही। एबीवीपी के साथ डॉ. आंबेडकर मिशनरीज विद्यार्थी असोसिएशन और चौधरी छोटूराम युवा छात्रा प्रदर्शन में शामिल थे।

केंद्र में जब से भाजपा की सरकार बानी हैं AVBP और आरएसएस के हौसले बुलंद हैं। हरियाणा में भी दलितों के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी हुई हैं। हरियाणा में आये रोज़ इस तरह की घटनाएं होना आम बात हो गयी हैं। 

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