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हरियाणा में दलितों को कावड़ चढ़ाने से रोका

सबसे पहले तो अपने सभी देश वासियो को 69वे स्वतंत्र दिवस की सुभ कामनाएं देना चाहता हू। जहा आज पूरा देश स्वतंत्र का जश्न मन रहा हैं वही हरियाणा के गांव डिडवाड़ा में कावड़ लिए दलितों को मंदिर में गंगाजल चढ़ाने से रोकने का मामला सामने आया है। मैंने कल अपने ब्लॉग पर राजस्थान में हुई एक घटना का उल्लेख किया था जिसमें एक दलित महिला को मंदिर में पूजा करने से रोक गया था।  गांव के दलितों ने घटना के दो दिन बाद शुक्रवार (14/08/2015 ) को एसडीएम कार्यालय में जमकर नारेबाजी कर नाराजगी जाहिर की और एसडीएम बलराज जाखड़ को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने शांति बनाए रखने व दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। 
दलित समुदाय से संबंध रखने वाले ग्रामीणों ने कहा कि शिवरात्री के दिन वे कावड़ लेकर गांव में पंहुचे थे। जब वे गांव के मंदिर में गंगाजल को अर्पित करने लगे तो गांव के कई लोगो ने उन्हे मंदिर में गंगाजल चढ़ाने से रोक दिया। इससे उन्हें गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर गांव बडौद के शिव मंदिर में पूजा कर गंगाजल अर्पित करना पड़ा। इन लोगों ने बताया कि पिछले दो दिनो से गांव में तनाव का माहौल है और मजबूरन उन्हें दो दिन बाद इस मामले की शिकायत देनी पड़ी। इस मामले में एसडीएम ने शांति बनाए रखने व दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
देश तो आजाद हो गया लेकिन ये आज़ादी कुछ लोगो के लिए ही हैं। दलितों को इस आज़ादी का हिस्सा बनने में न जाने कितना समय लगेगा। कल मुझे अपने एक पाठक का मेल मिला था वो बोल रहे थे की हमें ये दलित शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाइये ये हमें छोटी जात का होने का अहसास करवाता हैं। में उसके जवाब में यही कहना चाहता हु के ये शब्द हमने अपनी इच्छा से नहीं अपनाया हैं ये हम पर जबरदस्ती थोपा गया हैं। 
                                                                 जय हिन्द!! जय भीम !!

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