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हरियाणा में दलितो का धर्म परिवर्तन हिन्दू धर्म के ठेकेदारो के लिए एक चेतावनी हैं।

हरियाणा के हिसार में सैकड़ों दलितों ने हिन्दू धर्म को त्यागकर ‘इस्लाम' धर्म स्वीकार कर लिया। ये घटना सीधे तौर पर हिन्दू धर्म के ठेकेदारों ब्राह्मणों-पण्डे-पुजारियों के लिए चेतावनी है। इस घटना को दलितो के विरोध प्रकट करने के बिलकुल अलग तरीके के रूप में देखा जा सकता हैं।

इस से पहले इसी साल उत्तर प्रदेश के रामपुर में भी 800 से अधिक दलित परिवारों ने हिन्दू धर्म छोड़ कर इस्लाम काबुल कर लिया था। इस तरह की घटनाओ के लिए उन तमाम लोगों को जवाब देना होगा जिनहोंने अपने ही भाइयों को धर्म की चौखट से, मन्दिरों से, आत्मसम्मान से और उनके वाजिब हक से उन्हें दूर रखा।

देश में अभी भी कई ऐसे मंदिर या धार्मिक स्थान हैं जहा दलित और आदिवासियो को पूजा करने की इजाजत नहीं हैं। यही नहीं देश के कई इलाको में दलितो को उन कुओ या पानी के स्रोतो से पानी नहीं भरने दिया जाता जहा से ऊंची जाती के लोग पानी भरते हैं। मध्य प्रदेश के एक गाँव में एक दलित लड़की को सिर्फ इस लिए पीट दिया गया क्यों की उस की छाया एक ऊपरी जाती के व्यक्ति के खाने पर पद गयी थी। देश में शिक्षा का प्रसार हो रहा हैं, सूचना तकनीकी में विकाश की वजह से लोगो में जागरूकता आ रही हैं , लोग अपने अधिकारो के प्रति जागरूक हो रहे हैं, देश के दलितो में भी बुद्धिजीवी बर्ग का विकास हुआ हैं जो अपने लोगो को सही गलत से अवगत कराते हैं।

हिसार के इन लोगों को इस्लाम में क्या मिलेगा?? और क्या उनके वे सवाल सुलझ जायेंगे जिसके लिए उन्होंने अपना घर छोड़ा है?? बता दें कि इन लोगों ने कथित ऊंची जातियों के व्यवहार से तंग आकर इस्लाम स्वीकार किया है। ये जंतर-मंतर पर भी धरना देते रहे हैं। ये वही हरियाणा हैं जहा मिर्चपुर में ऊंची जाती के लोगो ने कई दलितो की हत्या के बाद सैकड़ो घरो में आग लगा दी थी।

इस तरह के धर्म परिवर्तन भविष्य में न हो इस के लिए हिन्दू धर्म के विभिन्न संगठनो जैसे , विश्व हिन्दु परिषद को अपने तरीको में बदलाव लाना होगा। साथ ही हिन्दू धर्म में सुधार के लिए ज़रूरी कदम उठाने होंगे। दलितो को मुख्य धारा में लाके ही उन को ज़रूरी सम्मान दिया जा सकता हैं। 

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