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बंद होने के कगार पर पहुंचा दलित SME फंड

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की ओर से दो वर्ष पहले लॉन्च किया गया दलित एस.एम.ई फंड बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। इस फंड के पीछे मोटेंक सिंह अहलूवालिया का दिमाग था। दलित इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के चेयरमैन मिलिंद कांबले ने बताया, 'फंड अब ऑपरेशनल नहीं है। हम पैसा नहीं जुटा सके क्योंकि हम आर्थिक संस्थानों को भरोसा नहीं दिला सके।'

डी.आई.सी.सी.आई. एस.एम.ई फंड के जरिए 10 वर्षों में 500 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद थी। इस फंड का इस्तेमाल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उद्यमियो की ओर से चलाई जाने वाली कम्पनियों को पूंजी मुहैया कराई जानी थी।

लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) 10 करोड़ रुपये के योगदान के साथ इस फंड का शुरुआती निवेशक था। यूपीए सरकार ने सरकारी बैंकों, सरकारी वीमा कंपनियों और डीआईसीसीआई के सदस्यों से भी फंड में योगदान देने के लिए कहा था।


हालांकि आर्थिक संस्थानों के दिलचस्पी न लेने और सरकार की ओर से इसी तरह के कुछ मिनी-फंड्स लॉन्च 
किए जाने के चलते डीआईसीसीआई फंड पीछे रह गया। फंड से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया, 'बैंकों और एलआईसी ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और कुछ आर्थिक संस्थानों ने फंड में योगदान से पूरी तरह मना कर दिया था। डीआईसीसीआई के धनी सदस्य भी फंड में योगदान देने के लिए आगे नहीं आए।' फंड के पंजीकरण के तीन वर्ष बीत जाने पर भी कुल कॉर्पस केवल 50 करोड़ रुपये का है। सरकार ने खुद कई मंत्रालयों के तहत मिनी-फंड्स लॉन्च किए हैं और इस वजह से भी यह फंड असफल हो गया। चिदंबरम ने अपने अंतिम बजट भाषण में एससी, एसटी एंटरप्राइजेज के लिए इंडस्ट्रियल फाइनैंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (आईएफसीआई) के साथ 200 करोड़ रुपये के एक अन्य फंड की भी घोषणा की थी।

फंड को अरुण जेटली ने 2014 में फाइनैंस मिनिस्टर के तौर पर चार्ज संभालने के बाद ऋण गारंटी वृद्धि योजना (सीजीईएस) के साथ पुनः प्रारम्भ किया था। इसके जरिए दलित कम्पनियों को रियायती दर पर ऋण मिलता है।

अर्ली स्टेज इन्वेस्टिंग फर्म अविष्कार के फाउंडर विनीत राय ने कहा, 'डीआईसीसीआई कैपिटल जुटाने के लिए एक खराब मॉडल पर निर्भर कर रहा था। फाइनैंस भावनाओं से जुड़ा मुद्दा नहीं है। फंड जुटाने पर फोकस करने के बजाय यह दिखाना चाहिए कि उद्यमियो में क्षमता है। दुनियाभर में कहीं भी सरकारी बैंक वीसी फंड्स में इन्वेस्टमेंट नहीं करते क्योंकि उनके पास इसके लिए प्रविजन नहीं होता।' डीआईसीसीआई के लिए फंड जुटाने की जिम्मेदारी संभालने वाले इन्वेस्टमेंट बैंक वरहद कैपिटल को अभी भी फंड के पटरी पर आने की उम्मीद है। वरहद कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रसाद दाहापुते ने कहा, 'नए विचारों को आगे बढ़ाने से पहले शुरुआती मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। फंड जुटाने की कोशिशें अभी भी चल रही हैं।'

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