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पासूनूरि रविंदर: जिन्होंने तेलुगू दलित साहित्य को नए आयामो तक पहुचाया

युवा कवि और लघु कहानी लेखक पासूनूरि रविंदर ने न केवल उनके साहित्यिक काम के लिए नाम और प्रसिद्धि अर्जित की, बल्कि हाल ही में युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार जीतकर तेलुगू दलित साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर नयी मान्यता भी दिलवाई हैं।

1980 में वारंगल के  शिवनगर में एक गरीब परिवार में जन्मे रविंदर वचपन में वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। लेखन के दौरान ही उन्हें सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव के बारे में गहराई से पता चला जिसे  उन्होंने अपने साहित्य में लिखकर उजागर किया।
पासूनूरि रविंदर
गरीबी की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने तेलुगू साहित्य में विशेषज्ञता के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने केन्द्रीय विश्वविद्यालय से पी.एच.डी करी और वर्तमान में पोस्ट डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहे है।

श्री रविंदर सक्रिय रूप से अलग तेलंगाना राज्य आंदोलन में शामिल थे और उन्होंने अपने लेखन, गाने और लघु कथाओ के माध्यम से आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन की ज्यादातर रचनायें जातिगत भेदभाव और जाति आधारित अपराधो के बारे में हैं।

श्री रविन्द्र सिंह ने उनके लेखन में उन दलितों को भी बेनकाब करने का प्रयास किया  हैं जो अपने स्वार्थ के लिए अपने ही समुदाय का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

साहित्य अकादमी ने उनकी छोटी कहानियों के संकलन कवरेज क्षेत्र से बाहर शीर्षक के लिए उन्हें सम्मानित किया।

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