सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हिंसा के बाद हरियाणा के गांव से 150 दलित परिवारों का पलायन

हरियाणा के जींद जिले के नरवाना क्षेत्र के धरौदी गांव में दलितों का सौ-सौ गज के प्लाटों पर कब्जे को लेकर हुए टकराव व हिंसा के बाद गांव में तनाव है। रविवार को गांव से करीब 150 दलित परिवार पलायन कर गए। गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। शनिवार को हुए टकराव व हिंसा मे घटना में मारे गए जाट युवक के शव का पोस्टमार्टम के बाद रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस गांव खासकर दलित बस्ती में गश्त कर रही है।

शनिवार को धरौदी गांव में बीपीएल परिवारों को अलॉट की जाने वाली पंचायती जमीन पर कब्जे दिलाने के दौरान हुई हिंसा में एक युवक की मौत हो गई थी और छह लोग घायल हो गए थे। दो पक्षों में पत्थरबाजी रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने नरवाना-टोहाना मार्ग पर जाम लगा दिया था और जींद डिपो की बस को आग लगा दी थी।

धरौदी गांव में तैनात पुलिस 
धरौदी गांव में बीपीएल परिवारों के लिए 146 प्लॉट अलॉट किए गए हैं। जिस पंचायती जमीन पर प्लाट अलॉट किए गए हैं, उस पर गांव के शमशेर नामक व्यक्ति का कब्जा है। इसकी शिकायत प्लॉट धारकों ने जींद के एसडीएम से की थी। एसडीएम ने कब्जा दिलाने के लिए बीडीपीओ को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया और कब्जा छुड़ाने के आदेश दिए।

बीडीपीओ सुरेंद्र कुमार शनिवार को सदर थाना प्रभारी मनजीत सिंह के साथ दल-बल को लेकर गांव में पहुंचे और जमीन से कब्जा छुड़वाने के लिए खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया। इसक बारे में पता चलते ही दूसरे गुट के लोग वहां पहुंच गए और उन्होंने इससे रोका। इस दौरान सरपंच महेंद्र पूनिया ने बीपीएल परिवारों को सूचना दी कि वे अपने प्लाटों की रजिस्टरी लेकर मौके पर आ जाएं और उनको कब्जा दिला दिया जाएगा।

सूचना मिलने पर वे जमीन की रजिस्टरी लेकर मौके पर पहुंच गए। इसके बाद विवाद बढ़ गया। सदर एसएचओ मनदीप कुमार ने इसकी सूचना डीएसपी आदर्शदीप सिंह को दी। डीएसपी आदर्शदीप सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए। इसी बीच दूसरे गुट के लोगों ने पथराव शुरूकर दिया और दूसरे गुट के लोगाें व पुसिल पर लाठी-डंडे से हमला कर दिया। इसे रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"अम्बेडकरवाद" क्या है ?

आज जिसे देखो वहीं, कहता नज़र आता है कि "मैं अम्बेडकरवादी हूँ"। लेकिन क्या उसे ये पता होता है की "अम्बेडकरवाद" है क्या? किसी किसी को शायद ये बड़ी मुश्किल से पता होता है कि "अम्बेडकरवाद" असल में है क्या? अम्बेडकरवाद" किसी भी धर्म, जाति, रूढ़वादिता, अंधविश्वास, अज्ञानता,किसी भी प्रकार के भेदभाव या रंगभेद को नहीं मानता, अम्बेडकरवाद मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानवता के लिए बनाने का नाम है। अम्बेडकरवाद वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों के नाम है। एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब मानव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना कर समाज और मानव हित में कार्य किया जाये।सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाकर जीवन जीना अम्बेडकरवाद नहीं है।आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है.... परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वो लोग छोड़ने को तैयार ही नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उद्धार हो पाया है? ........ अगर ऐसा होता तो शायद अम्बेडकरवाद का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से

दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

2011 के जनसंख्या आकड़ो के हिसाब से देश में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 16.6% हैं। तथा अनुमानत: 2015 तक अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या 217460000 (21.74 कऱोड़) हैं। आप हमेशा सोचते होंगे की देश के किस राज्य में देश की सबसे अधिक दलित आवादी निवास करती हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य नीचे सारणी में दिखाये गए हैं तथा उन राज्यों में लगभग कितनी दलित जनसंख्या हैं वो भी लिखी हुई हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य   Rank राज्य  % दलित आबादी   दलित आबादी 1 उत्तर प्रदेश 20.5  % 44579300 2 पश्चिम बंगाल 10.7  % 23268220  3 बिहार 8.2  % 17831720  4 तमिलनाडु 7.2  % 15657120  5 आंध्र प्रदेश 6.9  % 15004740  6 महाराष्ट्र 6.6  % 14352360  7 राजस्थान 6.1  % 13265060  8 मध्य प्रदेश 5.6  % 12177760  9 कर्नाटक 5.2  % 1130792

अर्ध सैनिक बलों नें आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ कर जांच करी कि यह लडकियां शादी शुदा हैं या नहीं

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास नामके गाँव में 12 जनवरी 2016 की यह घटना है।  संयुक्त सैन्य बलों नें पेद्दरास गाँव में जाकर हमला किया।  सुरक्षा बलों से सरकार नें कहा हुआ है कि अगर गांव में कोई भी आदिवासी युवा लड़की अविवाहित मिलती है तो उसे नक्सली मान लिया जाय क्योंकि नक्सली लडकियां शादी नहीं करती हैं।  इसलिए आजकल बस्तर में सिपाही आदिवासी लड़कियों को जब पकड़ते हैं तो आदिवासी लडकियां सिपाहियों से कहती हैं कि हमें मत मारो हम शादी शुदा हैं। सिपाही लड़कियों से शादी शुदा होने के प्रमाण के रूप में उनके स्तनों में दूध होने का प्रमाण दिखाने के लिए कहते हैं। अधिकतर मामलों में सिपाही खुद ही आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ते हैं छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास गाँव में विवेकानंद जयंती अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के दिन आदिवासी युवा लड़कियों पर सरकार के सिपाहियों नें हमला किया। सिपाहियों नें एक महिला का हाथ भी तोड़ दिया है। सिपाहियों नें गाँव की आदिवासी लड़कियों पर नक्सली होने का इलज़ाम लगाया लड़कियों नें कहा कि हमारी शादी हो चुकी है इस पर सिपाहियों नें लड़कियों से कहा कि सबूत दो कि तु