सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बदायूं: 14 साल की दलित लड़की के साथ गैंगरेप, सपा नेता के बेटे के खिलाफ केस दर्ज

दो चचेरी बहनों की पेड़ से लटकी लाश मिलने के बाद बदनाम हुआ यूपी का बदायूं एक बार फिर चर्चा में है। शनिवार को कादरचौक थाना क्षेत्र के नूरपुर में एक 14 साल की दलित लड़की के साथ गैंगरेप हुआ। स्थानीय सपा नेता के बेटे सहित तीन लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगा है। पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी दोनों की तलाश की जा रही है।

घटना शनिवार की शाम को हुई। दलित लड़की शौच के लिए खेतों की ओर गई थी। इसी दौरान गांव के ही सपा नेता के बेटे ओमेंद्र ने अपने साथियों के साथ उसको अगवा कर लिया। आरोपी उसे पड़ोसी गांव के जंगल में ले गए, जहां उसके साथ सबने बारी-बारी से रेप किया। इसके बाद उनलोगों ने पीड़िता को एक गांव में छोड़ दिया और फरार हो गए। यहां से पीड़िता किसी तरह अपने ममेरे भाई के घर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी दी। उसके भाई ही घरवालों को सूचित किया। परिजन पीड़िता को लेकर थाने पहुंचे। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के आधार पर मुख्य आरोपी सपा नेता के बेटे ओमेंद्र सहित उसके दो दोस्तों नरेंद्र और सुरेंद्र के खिलाफ रेप, एससीएसटी एक्ट और पॉक्सो की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने देर रात आरोपी सुरेंद्र को गिरफ्तार भी कर लिया है। सुरेंद्र सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का जिला प्रभारी है।

पीड़िता ने पुलिस को बताया, 'मैं रात को शौच के लिए गई थी। रास्ते में ओमेंद्र अपने दोस्त नरेंद्र और सुरेंद्र के साथ आ गए। सबने मुझे पकड़ लिया और जबरन बाइक पर बैठाकर जंगल की ओर ले गए। वहां मेरा रेप किया और एक दूसरे गांव में छोड़कर भाग गए।'

सौमित्र यादव, एसएसपी, बदायूं का कहना है कि सुरेंद्र से पूछताछ की जा रही है। उसके साथियों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पीड़िता के मेडिकल में रेप की पुष्टि हो चुकी है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"अम्बेडकरवाद" क्या है ?

आज जिसे देखो वहीं, कहता नज़र आता है कि "मैं अम्बेडकरवादी हूँ"। लेकिन क्या उसे ये पता होता है की "अम्बेडकरवाद" है क्या? किसी किसी को शायद ये बड़ी मुश्किल से पता होता है कि "अम्बेडकरवाद" असल में है क्या? अम्बेडकरवाद" किसी भी धर्म, जाति, रूढ़वादिता, अंधविश्वास, अज्ञानता,किसी भी प्रकार के भेदभाव या रंगभेद को नहीं मानता, अम्बेडकरवाद मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानवता के लिए बनाने का नाम है। अम्बेडकरवाद वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों के नाम है। एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब मानव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना कर समाज और मानव हित में कार्य किया जाये।सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाकर जीवन जीना अम्बेडकरवाद नहीं है।आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है.... परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वो लोग छोड़ने को तैयार ही नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उद्धार हो पाया है? ........ अगर ऐसा होता तो शायद अम्बेडकरवाद का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से

दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

2011 के जनसंख्या आकड़ो के हिसाब से देश में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 16.6% हैं। तथा अनुमानत: 2015 तक अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या 217460000 (21.74 कऱोड़) हैं। आप हमेशा सोचते होंगे की देश के किस राज्य में देश की सबसे अधिक दलित आवादी निवास करती हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य नीचे सारणी में दिखाये गए हैं तथा उन राज्यों में लगभग कितनी दलित जनसंख्या हैं वो भी लिखी हुई हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य   Rank राज्य  % दलित आबादी   दलित आबादी 1 उत्तर प्रदेश 20.5  % 44579300 2 पश्चिम बंगाल 10.7  % 23268220  3 बिहार 8.2  % 17831720  4 तमिलनाडु 7.2  % 15657120  5 आंध्र प्रदेश 6.9  % 15004740  6 महाराष्ट्र 6.6  % 14352360  7 राजस्थान 6.1  % 13265060  8 मध्य प्रदेश 5.6  % 12177760  9 कर्नाटक 5.2  % 1130792

अर्ध सैनिक बलों नें आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ कर जांच करी कि यह लडकियां शादी शुदा हैं या नहीं

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास नामके गाँव में 12 जनवरी 2016 की यह घटना है।  संयुक्त सैन्य बलों नें पेद्दरास गाँव में जाकर हमला किया।  सुरक्षा बलों से सरकार नें कहा हुआ है कि अगर गांव में कोई भी आदिवासी युवा लड़की अविवाहित मिलती है तो उसे नक्सली मान लिया जाय क्योंकि नक्सली लडकियां शादी नहीं करती हैं।  इसलिए आजकल बस्तर में सिपाही आदिवासी लड़कियों को जब पकड़ते हैं तो आदिवासी लडकियां सिपाहियों से कहती हैं कि हमें मत मारो हम शादी शुदा हैं। सिपाही लड़कियों से शादी शुदा होने के प्रमाण के रूप में उनके स्तनों में दूध होने का प्रमाण दिखाने के लिए कहते हैं। अधिकतर मामलों में सिपाही खुद ही आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ते हैं छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास गाँव में विवेकानंद जयंती अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के दिन आदिवासी युवा लड़कियों पर सरकार के सिपाहियों नें हमला किया। सिपाहियों नें एक महिला का हाथ भी तोड़ दिया है। सिपाहियों नें गाँव की आदिवासी लड़कियों पर नक्सली होने का इलज़ाम लगाया लड़कियों नें कहा कि हमारी शादी हो चुकी है इस पर सिपाहियों नें लड़कियों से कहा कि सबूत दो कि तु