सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

दबंगों का कहर, सरिया से पीटने के बाद गर्भवती दलित महिला से रेप की कोशिश

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में दलितों पर दबंगों के अत्याचार की घटनाएं थम नहीं रही हैं। ताजा मामले में रक्सा इलाके में एक दलित के घर घुसकर गर्भवती महिला से रेप की कोशिश और उसके कपड़े फाड़ने का आरोप दबंगों पर लगा है। बताया जा रहा है कि कुछ रकम वापसी को लेकर वारदात हुई। पीड़ित परिवार के मुताबिक दबंगों ने तमंचे से फायर भी किया और फरार हो गए। आरोप ये भी है कि पुलिस ने मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और एफआईआर की कॉपी भी नहीं दी। न ही मेडिकल कराया। वहीं, रक्सा थाने के इंचार्ज घटना को फर्जी बता रहे हैं।

घटना रक्सा के सारमऊ गांव में हुई है। इस गांव में दलितों के कुछ ही परिवार हैं। इन्हीं में से एक सुनील नाम के शख्स का आरोप है कि उसकी पत्नी, भाई भूरा और भाई की पत्नी खेत पर गए थे। खेत में बनी झोपड़ी में ये सभी थे, जब गांव के कुछ दबंग आए और उन्हें सरिया से पीटने लगे। विरोध करने पर सुनील की गर्भवती पत्नी के कपड़े फाड़ दिए और रेप की कोशिश की। इसमें नाकाम रहने पर फायर किया और भाग गए। सुनील के मुताबिक सरिए से जमकर हुई पिटाई की वजह से तीनों को गंभीर चोटें लगी हैं।
दबंगों को लौटानी है रकम
सुनील के मुताबिक दबंगों को कुछ रकम लौटानी है। उसने दो दिन बाद रकम लौटाने की बात कही थी। जिसके बाद ये वारदात हुई। सुनील और उसके परिवार ने एसएसपी किरण एस से न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, रक्सा थाने के प्रभारी रामबाबू, एफआईआर लिखे जाने के बावजूद घटना को फर्जी बता रहे हैं। उनके मुताबिक घटना नहीं हुई है और पैसे के लेन-देन के मामले की वजह से गलत इल्जाम लगाए जा रहे हैं। सवाल ये है कि अगर घटना नहीं हुई है तो पुलिस ने पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया। मेडिकल परीक्षण होने पर उनकी पिटाई के आरोपों की पुष्टि हो सकती है।
दलित उत्पीड़न की लगातार घटनाएं
इससे पहले बुंदेलखंड में दलित उत्पीड़न के कई मामले सामने आ चुके हैं। सिमरधा गांव में दबंगों ने दलित परिवार को घर से भगा दिया था। उन्हें जंगल में शरण लेनी पड़ी थी। वहीं, रक्सा में ही दबंगों ने युवक के प्राइवेट पार्ट पर कपड़ा बांध कर आग लगा दी थी और उसे मल-मूत्र भी खिलाया था। वहीं, सीपरी बाजार के एक गांव में मजदूरी मांगने पर दलित युवकों को बंधक बनाकर पीटते हुए जानवरों के इंजेक्शन लगा दिए थे। इसके अलावा, जालौन में शादी समारोह में साथ में खाना खाने पर दलित की नाक काट दी थी। वहीं, हमीरपुर में जाति का पता चलने पर नाई ने दलित की आधी शेविंग कर उसे अपमानित कर भगा दिया था।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"अम्बेडकरवाद" क्या है ?

आज जिसे देखो वहीं, कहता नज़र आता है कि "मैं अम्बेडकरवादी हूँ"। लेकिन क्या उसे ये पता होता है की "अम्बेडकरवाद" है क्या? किसी किसी को शायद ये बड़ी मुश्किल से पता होता है कि "अम्बेडकरवाद" असल में है क्या? अम्बेडकरवाद" किसी भी धर्म, जाति, रूढ़वादिता, अंधविश्वास, अज्ञानता,किसी भी प्रकार के भेदभाव या रंगभेद को नहीं मानता, अम्बेडकरवाद मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानवता के लिए बनाने का नाम है। अम्बेडकरवाद वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों के नाम है। एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब मानव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना कर समाज और मानव हित में कार्य किया जाये।सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाकर जीवन जीना अम्बेडकरवाद नहीं है।आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है.... परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वो लोग छोड़ने को तैयार ही नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उद्धार हो पाया है? ........ अगर ऐसा होता तो शायद अम्बेडकरवाद का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से

दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य

2011 के जनसंख्या आकड़ो के हिसाब से देश में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 16.6% हैं। तथा अनुमानत: 2015 तक अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या 217460000 (21.74 कऱोड़) हैं। आप हमेशा सोचते होंगे की देश के किस राज्य में देश की सबसे अधिक दलित आवादी निवास करती हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य नीचे सारणी में दिखाये गए हैं तथा उन राज्यों में लगभग कितनी दलित जनसंख्या हैं वो भी लिखी हुई हैं। दलित जनसंख्या के हिसाब से 10 बड़े राज्य   Rank राज्य  % दलित आबादी   दलित आबादी 1 उत्तर प्रदेश 20.5  % 44579300 2 पश्चिम बंगाल 10.7  % 23268220  3 बिहार 8.2  % 17831720  4 तमिलनाडु 7.2  % 15657120  5 आंध्र प्रदेश 6.9  % 15004740  6 महाराष्ट्र 6.6  % 14352360  7 राजस्थान 6.1  % 13265060  8 मध्य प्रदेश 5.6  % 12177760  9 कर्नाटक 5.2  % 1130792

अर्ध सैनिक बलों नें आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ कर जांच करी कि यह लडकियां शादी शुदा हैं या नहीं

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास नामके गाँव में 12 जनवरी 2016 की यह घटना है।  संयुक्त सैन्य बलों नें पेद्दरास गाँव में जाकर हमला किया।  सुरक्षा बलों से सरकार नें कहा हुआ है कि अगर गांव में कोई भी आदिवासी युवा लड़की अविवाहित मिलती है तो उसे नक्सली मान लिया जाय क्योंकि नक्सली लडकियां शादी नहीं करती हैं।  इसलिए आजकल बस्तर में सिपाही आदिवासी लड़कियों को जब पकड़ते हैं तो आदिवासी लडकियां सिपाहियों से कहती हैं कि हमें मत मारो हम शादी शुदा हैं। सिपाही लड़कियों से शादी शुदा होने के प्रमाण के रूप में उनके स्तनों में दूध होने का प्रमाण दिखाने के लिए कहते हैं। अधिकतर मामलों में सिपाही खुद ही आदिवासी लड़कियों के स्तनों को निचोड़ते हैं छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पेद्दरास गाँव में विवेकानंद जयंती अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के दिन आदिवासी युवा लड़कियों पर सरकार के सिपाहियों नें हमला किया। सिपाहियों नें एक महिला का हाथ भी तोड़ दिया है। सिपाहियों नें गाँव की आदिवासी लड़कियों पर नक्सली होने का इलज़ाम लगाया लड़कियों नें कहा कि हमारी शादी हो चुकी है इस पर सिपाहियों नें लड़कियों से कहा कि सबूत दो कि तु