मध्यप्रदेश में दलित महिला जज को गवाह ने दीं जाति सूचक गालियां

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जब कोई जज किसी केस पर अपनी फैसला सुनाता है तो सब उस फैसले का पालन करते है लेकिन मध्यप्रदेश के राजगढ़ की जिला कोर्ट में बोर्ड पर बैठे जज को जाति सूचक शब्द कहने का मामला सामने आया है। वहीं इस मामले में राजगढ़ की जिला कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और आरोपी को पांच वर्ष की सजा सुनाकर जेल भेज दिया। 

आपको बता दें कि अजा-जजा एक्ट में प्राय: तीन माह से छह माह और अधिकाधिक एक वर्ष की सजा होती रही है। देश में संभवत: पहली बार ऐसे मामले में पांच वर्ष की सजा सुनाई गई है।


27 अप्रैल 2015 को राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ कोर्ट में घटी। अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश पदमा जाटव एक मामले की सुनवाई कर रही थी तब गवाह ने उन्हें जाति सूचक शब्द कहते हुए दुर्व्यवहार किया था। जब जज पदमा जाटव के कोर्ट में एक मामले में आरोपी महेंद्र जाट गवाही देने आया था। तो वकील ने उसे कहा कि आज मुलजिम नहीं आए हैं इसलिए वह उसकी गवाही नहीं ले पाएगा।

इस पर जज पदमा ने गवाह से कहा था कि वह अगली सुनवाई पर आ जाए। इस पर आरोपी गवाह ने जज जाटव को उनकी जाति का नाम लेकर भरी अदालत में अपमानित किया था। मामले में जज की शिकायत पर वहां की पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आदिम जाति जन जाति अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश राजेशकुमार गुप्ता की कोर्ट में चालान पेश किया था।

कोर्ट ने इस मामले को लेकर कड़ी टिप्पणी की कि बोर्ड पर बैठकर न्यायिक कार्य का निर्वहन करते समय यह कृत्य न केवल गंभीर अपराध है बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण है। यह फैसला राजगढ़ जिला कोर्ट में विशेष न्यायाधीश (अजा-जजा) राजेशकुमार गुप्ता ने सुनाते हुए तल्ख टिप्पणी की कि कोर्ट द्वारा जब भी किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मनमाफिक फैसला नहीं सुनाने पर वह जज के साथ दुर्व्यवहार पर आमादा हो जाता है। साथ ही कहा कि कोर्ट के प्रति बढ़ती हुई असहिष्णुता चिंता जनक है। इसी कारण आरोपी महेंद्र जाट को सख्त से सख्त सजा दी जाना आवश्यक है।

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