गुजरात में एक दलित परिवार को शौचालय नहीं बनाने दे रहे दबंग!

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यू तो देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी स्वच्छ भारत का धिन्डोरा पूरी दुनिया में पीटते रहते हैं। लेकिन उनके ही राज्य गुजरात के मेहसाणा में एक दलित परिवार शौचालय बनवाने के लिए पिछले दो साल से परेशान है, लेकिन सवर्णों के विरोध की वजह से उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही है।

मामला लक्ष्मीपुरा-भांडू गांव का है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक शौचालय नहीं होने की वजह से दलित परिवार को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें अपने घर से आधा किलोमीटर दूर खुले में जाना पड़ता है।
एक शौचालय बनवाने के लिए परेशान दलित परिवार
Image Credit: Indianexpress
लक्ष्मीपुरा-भांडू गांव, मेहसाणा के विषनगर तालुका में स्थित छोटा सा गांव है। ये गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीपटेल पटेल का गृह जिला है। इस गांव की कुल जनसंख्या 500 के करीब है। इस गांव में वित्तीय और राजनैतिक तौर पर चौधरी समाज का दबदबा है। इसमें केवल एक दलित परिवार है। 65 वर्षीय भीखाभाई सेनमा इसके मुखिया हैं। वह एक भूमिहीन किसान हैं।

सेनमा का घर गांव में प्रवेश करते ही सबसे पहले पड़ता है। उनके परिवार में 13 सदस्य हैं। सेनमा ने बताया कि हम अपने घर के बाहर एक शौचालय बनवाना चाहते हैं। लेकिन गांव के रहने वाले कुछ लोगों ने हमें इसका आदेश नहीं दिया। उनके मुताबिक जिस जमीन पर हम इसे बनाना चाहते हैं वह चरागाह की भूमि है और हम पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है।


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सेनमा के मुताबिक, उन पर चरागाह की जमीन को कब्जाने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है। गांव के ही एक स्कूल के शिक्षक विजय चौधरी के नेतृत्व में कुछ ग्रामीण इसके जरिए हमें शौचालय बनाने से रोक रहे हैं। सेनमा के मुताबिक विजय चौधरी का घर उनके घर से थोड़ा पीछे है।

सेनमा के मुताबिक, 'गांव का चौधरी परिवार अपने दबदबे के चलते हमेशा उन्हें दबा के रखता है। उन्होंने कहा कि अगर हम शौचालय का निर्माण कराने की हैं तो पहले उन्हें लड़ाई करनी होगी।'
सेनमा ने कहा कि उनके फैसले का विरोध करने के पीछे एक जमीन का टुकड़ा वजह है। जो उनके घर के पास है। ये सरकारी जमीन है, जिस पर विजय चौधरी अपने घर के पीछे का रास्ता निकालना चाहते हैं। इसी के चलते वह लगातार शौचालय बनाने के उनके फैसले का विरोध किया जा रहा है। इस मामले में मैंने प्रशासन के साथ-साथ राज्य मानवाधिकार आयोग से भी शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिलहाल सेनमा ने बताया कि अब वह इस मुद्दे को छोड़ चुके हैं। हमने शौचालय बनाने का विचार छोड़ दिया है।

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दूसरी ओर सेनमा के आरोपों पर विजय चौधरी ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने सेनमा के आरोपों को खारिज किया है। विजय चौधरी के मुताबिक उन्होंने चरागाह वाली जमीन को लेकर गुजरात हाईकोर्ट में 2015 में एक पीआईएल दायर की थी। जिसमें मैंने पूछा था कि आखिर इस जमीन पर क्या नया निर्माण किया जाना है? चूंकि मामला कोर्ट में है ऐसे में कोर्ट अगर उन्हें उस जमीन पर शौचालय बनाने की आज्ञा देता है तो मैं इसका विरोध नहीं करूंगा। इसके साथ-साथ विजय चौधरी ने कहा कि उनका सेनमा से कोई विवाद नहीं है।

इस पूरे विवाद पर सेनमा ने बताया कि विजय चौधरी की ओर से कहा गया कि उनका घर चरागाह वाली जमीन पर स्थित है। हमें यहां 1966 से रह रहे हैं और इसके लिए मैं ग्राम पंचायत को टैक्स भी दे रहा हूं। हमारा घर सरकार के अंबेडकर आवास योजना के तहत बनवाया गया था। 

हालांकि, इलाके के अधिकारियों से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने इस विवाद के पीछे अहंकार में टकराव को अहम वजह बताया है। मेहसाणा के डीडीओ एसके लांगा ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने के लिए कई बार कोशिश की गई लेकिन सुलह नहीं हो सकी। हमने शौचालय के लिए सेनमा परिवार को दूसरी जगह जमीन मुहैया कराई थी लेकिन उन्होंने इसे मानने से इंकार कर दिया।

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