छत्तीसगढ़ सरकार ने वन भूमि पर आदिवासी अधिकार रद्द किये

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छत्तीसगढ़ सरकार ने सरगुजा जिले के घटबर्रा गांव में आदिवासियों के अपने पारंपरिक भूमि पर वन अधिकार को खत्म कर दिया हैं।  ऐसा करने का उद्देश हैं परसा पूर्व और कटे बेसन कोयला ब्लॉक में कोयला खनन को  हैं।


ये कोयला ब्लॉक राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) और आदानी खनिज प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किये गये है।

8 जनवरी को पारित एक आदेश में सरकार ने वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत दिए गए गांव में आदिवासियों के समुदाय भूमि अधिकार रद्द कर दिये हैं। सरकार के आदेश में कहा गया है कि ग्रामीण वन अधिकार कानून का उपयोग करके गाव के पास के कोल् ब्लॉक पर खनन होने नहीं दे रहे थे। 

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आदिवासियों के कानूनी अधिकारों पर हमला करने वाला यह पहला मामला हैं। याद रहे आदिवासियों को 2006 के एक कानून के तहत वन भूमि पर कुछ अधिकार  दिए गए हैं। इस कानून के तहत जंगल के उस हिस्से में जहा आदिवासी रहते हैं वहा की वन भूमि और वन उत्पादों पर आदिवासियों का अधिकार होता हैं। 


वन अधिकार कानून (FRA ) के तहत आदिवासियों को जो अधिकार प्राप्त हैं उन्हें किसी भी सूरत  भी द्वारा छीना नहीं जा सकता। आदिवासियों की वन भूमि को ग्राम सभा के आदेश या फैसले से ही किसी और उपयोग में लाया जा सकता हैं।

References :
http://wap.business-standard.com/article/current-affairs/chhattisgarh-govt-cancels-tribal-rights-over-forests-to-facilitiate-coal-mining-116021601327_1.html

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