ना जाने ऐसे कितने रोहित गुमनामी के अंधेरे में खो गये!

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दोस्तों रोहित वेमुला की मौत ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नयी वहस को जन्म दिया हैं। जिसका उद्देश यह हैं के देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में ये जातिगत भेदभाव कब तक चलता रहेगा। आज फेसबुक पर एक पाठक ने एक और दलित स्टूडेंट की स्टोरी मेरे साथ शेयर की हैं। इसे में आप लोगो के सामने रख रहा हूँ। 

छात्र का नाम- अजय श्री चन्द्रा
संस्थान का नाम - IISC, बैंगलोर
आत्महत्या दिनांक - 26 अगस्त 2007
मौत का कारण- प्रोफेसरों की क्रूर आँखे
अजय श्री चन्द्रा एक विशुद्ध गांव का लड़का होते हुए भी पीएचडी कोर्स के एडमिशन सीट में सामान्य कोटे से एडमिशन हुआ था।  उसमें पढ़ने का जूनून और उसकी प्रतिभा का अंदाज़ा इसी वात से लगाया जा सकता हैं की वह 2006 के पीएचडी एंट्रेंस एक्जाम में आल ओवर इण्डिया के टाप 12 में से एक था। 



वह एक दिन अपने कमरे में मरा हुआ मिलता है उसकी सुसाइड नोट से छेड़छाड़ किया गया था अजय जिस डायरी को रोज मेंटेन करता था उसके पन्ने गायब थे। उसके दोस्तों के अनुसार उसे भारी मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी उसके ऊपर जाती का बार-बार लेबल लगाया जाता था। उसकी मौत होती है उसके पिताजी अपने बेटे के मौत को सामान्य मानकर ले जाते है पर वो 02 महीने बाद शाक हो जाते है जब वहां का SC/ST यूनियन यह बताता है उसकी बेटे की मौत मानसिक प्रताड़ना के चलते हुई है। 



अजय के साथ क्या हुआ नही हुआ ये जानने के लिए सिर्फ उसकी डायरी के चार लाइन काफी है “Those eyes, they scare me, they look with such inferiority/superiority complex @you. They tell everything (most of that time). Those eyes scare me… those scares me a lot. My legs are paining…”अब वो आँखे किनकी थी पुलिस आज तक नही जान पाई, कितनी खतरनाक आँखे है जो 12 आल इण्डिया टॉपर में से एक स्टूडेंट की जान ले लेती है। आँखे ही इतनी खतरनाक है तो जब ये किसी ऐसे विद्यार्थी की उत्तर पुस्तिका जांचते वक्त, इंटरव्यू में नम्बर देते वक्त, प्रेक्टिकल एक्जाम में नम्बर देते वक्त कितना कहर बरपाती होगी। सोचिये-सोचिये.......और फेसबुक जैसे माध्यम में है तो सिर्फ लाइक, शेयर कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री मत समझिये, मुर्दे की तरह मत रहिये कलम उठाइये, क्योकि कलम का ही असर है जिसके चलते सरकार टेंशन में है, मुखिया भावुक होकर भारत का लाल कह रहे है, 330, 332 वाले हैदराबाद पहुंच रहे है और लोग सड़क पर आ रहे है। कलम उठाइये कलम। 


References 

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