आरक्षण की समीक्षा की जाये: RSS अध्यक्ष मोहन भागवत

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आजकल देश में अनुसूचित जाति और जनजातियो को मिलने वाले आरक्षण के खिलाफ वयानो की बाढ़ सी आ गयी हैं। कोई तर्क दे रहा हैं की इसे ख़त्म कर देना कहिये, कोई बोल रहा हैं इसे जाति आधारित न देकर आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिये। मध्य प्रदेश में तो आरक्षण के खिलाफ रैली भी निकाली गयी हैं। देश के कई भागो में कई जातिया आरक्षण का लाभ लेने के लिए आन्दोलन कर रही हैं। इनमें से प्रमुख हैं गुजरात में पटेल समुदाय और राजस्थान के गुर्जर, उत्तर प्रदेश में जाट और महारास्ट्र के मराठा। 
लेकिन इन सभी घटनाओ पर गौर करें तो इन सब में केंद्र में  BJP सरकार आने के बाद से तेजी सी आ गयी हैं और इसमें कोई बड़ी बात नहीं हैं BJP का गठन ही आरक्षण का विरोध करते हुए हुआ था और इसका परम्परागत वोट बैंक हमेशा से इसके खिलाफ रहा हैं।     
देश में जगह जगह कई संगठनो के आरक्षण को लेकर चल रहे आंदोलनों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण पर पुनर्विचार करने की बात कही है। संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य' और 'आर्गेनाइज़र' को दिए इंटरव्यू में भागवत ने कहा है कि आरक्षण की ज़रूरत और उसकी समय सीमा पर एक समिति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने मोदी सरकार को एक ऐसी समिति बनाने की सलाह दी हैं जो इस पर विचार करें। 
ये बात भी किसी से छुपी नहीं हैं की इस समय देश में जो RSS चाहता हैं वही होता हैं इस लिए मोहन भागवत के बयान को गंभीरता से लेने की ज़रूरत हैं। अतः बह समय दूर नहीं जब एक-एक करके आरक्षण का लाभ ले रही जातियों को इससे बाहर किया जाने लगे। फिलहाल BJP सरकार बिहार चुनाव को ध्यान में रखते हुए कोई कदम न उठाये लेकिन निकट भविष्य में ऐसा कुछ ज़रूर करेगी।

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