आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मनुवादी षडयंत्र क्यों?

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प्राचीन काल से जंगलो में रह रहे आदिवासियो को उनके ही क्षेत्रों में अल्पसंख्यक बनाने का षड्यंत्र बहुत दिनों से जारी है जहां सब जगह जनसंख्या बढ रही है इनकी घट रही है क्यों पलायन या षडयंत्र ? मनुवादी मीडिया ने इनका संज्ञान लिया ? बहुत तो अभी आदिवासी प्रमाणपत्र व आदिवासी मे सम्मिलित होने के लिए भटक रहे हैं। इनसे मनुवादी किस तरह व्यवहार करते हैं कल्पना ही डरा देती है। इसका कारण भी पुराने सूद्र के जैसा है।

आधुनिक शिक्षा से या कहिए मनुवादी शिक्षा से सदियों तक दूर रहे इन पेड (जीवन) रक्षक को सरकारी फाइलों के नीचे दबाया जा रहा है इनकी सस्कृति , सभ्यता को खत्म किया जा रहा है ।उपजाऊ जमीन पर कब्जा , बुधुंआ मजदूरी ,इनकी बहू बेटियों से रेप का जिम्मेदार कौन है।
इन क्षेत्रों में अचानक अन्य लोग कहाँ से आ गये। सब यही मनुवादी लोग हैं।जिनका जमीन, प्रकृति से कोई संबंध नहीं बस दूसरे के परिश्रम व प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा कर दोहन एवं सौदा कर शहरों मे पलायन है।सबसे बडी बात आप अगर क्लाइमेट परिवतॆन व धरती बचाओ मे लगे हो तो इनके सुरक्षित वातावरण पर घात क्या है?

मै सभी सूद्र भाइयों से इनकी ओर भी ध्यान देने का आग्रह करूगां।

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