मध्य प्रदेश में निकाली आरक्षण को समाप्त करने के लिए रैली

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गुजरात में हार्दिक पटेल की ओर से पटेल समुदाय को आरक्षण दिए जाने की मांग के साथ शुरू हुए आंदोलन के बाद, अब मध्‍य प्रदेश के हरदा जिले में पहली बार आरक्षण व्‍यवस्‍था के विरोध में 8 सितम्बर, 2015 को  रैली निकाली गई।  इस रैली में शहर और जिले के आसपास के गांवों के कई लोग शामिल हुए।  शहर के मुख्‍य चौराहों से निकाली गई इस रैली में हजारों लोगों ने हिस्‍सा लिया।


आरक्षण मुक्‍त भारत के अभियान की तख्‍तियां हाथों में लिए इस रैली में सवर्ण जाति के लोगों ने हिस्सा लिया। हालांकि इनकी संख्‍या ज्‍यादा नहीं थी। आपको बता दें कि 25 अगस्‍त को गुजरात के अहमदाबाद में शुरू हुए आरक्षण की मांग को लेकर पटेलों के उग्र और हिंसक आंदोलन के बाद मध्‍य प्रदेश के हरदा जिले में पहली बार आरक्षण मुक्‍त भारत अभियान की शुरुआत हुई है। इस रैली में सभी वर्गों, धर्मों और जाति के लोगों को शामिल करने की बात की जा रही थी। जबकि आंदोलन की रूपरेखा 25 अगस्‍त को हार्दिक पटेल के अहमदाबाद के आंदोलन के बाद ही बनना शुरू हो गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस आंदोलन की शुरूआत ओबीसी और सवर्ण वर्ग के लोगों ने ही की है।

इस रैली को कई सवर्ण शिक्षाविदो ने संबोधित किया। जबकि आयोजकों ने आरक्षण मुक्‍त भारत अभियान की रूपरेखा सामने रखी। हरदा जिले में लाल बहादुर शास्‍त्री महाविद्यालय के डायरेक्‍टर राजीव खरे ने कहा कि इस रैली का उद्देश्‍य आरक्षण की वर्तमान नीतियों का विरोध करना है। उन्‍होंने कहा कि इस बात में कोई दो राय नहीं कि आरक्षण एकदम से खत्‍म नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि यह दिया ही जाना है, तो फिर यह जाति की बजाय आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।

खरे ने कहा कि वे इस रैली और अभियान के माध्‍यम से सरकार से इस बात की मांग करते हैं कि आरक्षण का लाभ सभी वर्गों के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को मिले, और जो सक्षम हैं, उन्‍हें आरक्षण का लाभ मिलना बंद किया जाना चाहिए। इस आंदोलन की शुरुआत करने वाले प्रमुख लोगों में से एक ईश्‍वर विश्‍नोई ने कहा कि डॉ बाबा साहेब अंबेडकर आज य‍हां होते तो उन्‍हें देश में आरक्षण को लेकर हो रहे विवाद को देखकर बहुत दुख होता। उन्‍होंने कहा हमारा उद्देश्‍य इस अभियान के माध्‍यम से देश में आरक्षण को खत्‍म करने की मांग करना है।

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