अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक को लोकसभा की मंजूरी

कोई टिप्पणी नहीं
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों पर अत्याचार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के प्रावधान वाले विधेयक को लोकसभा ने मंगलवार (04/08/2015) को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

इससे पूर्व अधिकांश विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण), संशोधन विधेयक, 2014 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान सरकार ने इन वर्गों पर अत्याचार रोकने के लिए कई कदम उठाये हैं।

हाथ से मैला ढोने की प्रथा समाप्त करने और उनके पुनर्वास के लिए कई तरह की पहल की गई हैं। पुनर्वास के लिए उन्हें नकदी और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के प्रति समाज की मानसिकता बदलने और कर्तव्यबोध के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

यह विधेयक पारित होने के बाद इन वर्गों के लोगों पर होने वाले अत्याचार पर अंकुश लगेगा। कानून का दुरुपयोग रोकने के सदस्यों के सुझाव पर उन्होंने कहा कि पहले से ही ऐसे कानून हैं जिनके तहत झूठी शिकायत करने वालों को दंडित करने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रा बैंक की स्थापना की है और इससे इस समुदाय को बड़ा लाभ मिलेगा। इस विधेयक के पारित होने से इस वर्ग पर होने वाले अत्याचार की बढ़ती घटनाओं को रोका जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों पर सबसे अधिक अत्याचार की घटनाएं राजस्थान में हुई है जबकि बिहार दूसरे स्थान पर है। इसी तरह से अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथ केरल में सर्वाधिक अत्याचार की घटनाएं हुई है।


इस क्रम में राजस्थान दूसरे स्थान पर है। उनका कहना था कि इन वर्गों पर होने वाले अत्याचार रोकने के लिए यह कानून जरूरी है और इसे सख्ती से लागू किए जाने की जरूरत है।

कोई टिप्पणी नहीं :

एक टिप्पणी भेजें