अनुसूचित जाति आयोग ने हरियाणा में दलितों के धर्मांतरण को गलत बताया

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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग ने भगाना गांव के दलितों के धर्म परिवर्तन के कदम को गलत बताया है। आयोग का कहना है कि इस्लाम धर्म अपना लेने से ग्रामीणों की समस्या हल नहीं होगी। साथ ही गांव से दूर दूसरी जगह बसाए जाने की मांग को भी उचित नहीं ठहराया है।
भगाना गांव में धर्म परिवर्तन करने वाले लोग 
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने गुरुवार को फतेहाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि भगाना के दलितों की ओर से धर्म परिवर्तन करके इस्लाम धर्म कबूलने से उनकी समस्याएं हल नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि भगाना के मामले में वह खुद तीन बार गांव भगाना जा चुके हैं। सरकार ने उनको अलग से जगह व मुआवजा भी दे दिया है, लेकिन भगाना के दलित गांव से 3 किलोमीटर दूर अलग बस्ती की मांग कर रहे हैं, जो कि उचित नहीं लगती। अगर उन्हें कोई तकलीफ है तो वे धर्म बदलने की बजाय आयोग के पास आएं, आयोग उनकी समस्या हल करेगा।

पत्रकारों से बात करते हुए ईश्वर सिंह ने कहा कि हरियाणा में पंजाब के मुकाबले दलितों के प्रति क्राइम बढ़ा है। सामाजिक सोच बदलने की जरूरत है। चंडीगढ़ एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां पिछले दो वर्षों में एससी-एसटी एक्ट में कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

अनुसूचित जाति आयोग कुछ भी कहे लेकिन आयोग को अपने अंदर झाँख कर देखना चाहिये। दरअसल यह आयोग बिना किसी अधिकारों का आयोग हैं। आयोग को बने 25 साल से जयादा हो गए लेकिन इसने कितने लोगो को न्याय दिलवाया हैं?? यह आयोग भी अपनी जाँच के लिए उसी पुलिस व्यस्था और न्याय पालिका पर निर्भर करता हैं जिस पर मनुवादियों ने कब्ज़ा कर रखा हैं।
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