गुजरात सरकार ने आंबेडकर की शिक्षाओं को बताया हिंदू विरोधी

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डॉ बी. आर. अम्बेडर को दलित आइकॉन के रूप में सम्मान देने का वादा भारतीय जनता पार्टी का एक और जुमला नज़र अत हैं। आंबेडकर के 125वें जन्म दिवस पे भाजपा के आला नेताओ ने जो गर्म जोशी दिखाई थी वो अब फुर्र होती नज़र आती हैं। तभी तो  गुजरात सरकार ने स्कूलों से संविधान निर्माता बाबा साहब आंबेडकर की किताबों को यह कहकर वापस ले लिया है कि वे हिंदू विरोधी हैं। 

ये किताबें 5वीं से 8वीं कक्षा के बच्चों को बांटी जा रही थी। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक सरकार का कहना है कि इस तरह की शिक्षा से हिंदू धर्म के प्रति बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ध्यान देने योग्य बात यह हैं की भूतकाल में देश के बर्तमान प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी ने भी गुजरात का मुख्या मंत्री रहते हुए दलितों एवं बाबा साहेब के बारे में अप्पतिजनक बयान दिया था।

यह किताबें आंबेडकर की 125वीं जयंती समारोह के तहत बच्चों को बांटी गयीं थीं जिससे विद्यार्थी आंबेडकर पर एक राज्य स्तरीय परीक्षा प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर सके। प्रेषक ने इस किताब में 1956 में नागपुर में बाबा साहब द्वारा अपने हज़ारो समर्थको सहित हिंदू से बौद्ध बनने के दौरान ली गयीं '22 शपथ' का भी उल्लेख किया हुआ था। सरकार ने इसी कंटेंट पर ऐतराज जताते हुए किताब को वापस लिया है। यह किताब गुजरात के दलित स्कॉलर और सामाजिक न्याय एंव विकास विभाग में कार्यरत पी.ए. परमार ने लिखी है। 

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