दलितों का नारशंहार करने वाली रणवीर सेना को BJP के कई नेता कर रहे थे मदद

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रणवीर सेना के लड़ाके  
1990 के दसक में बिहार में दलितों के खिलाफ हुए नरसंहारों को कोन भूल सकता हैं। 1990 के दसक में पैदा हुए दलित और आदिवासी लोग शायद इस बात का अनुमान भी न लगा पाए के उनके बुजुर्गो पे ऊँची जाती के लोगो ने कैसे कैसे जुल्म किये हैं।  बिहार के छह जिलो आरह, अरवल, भोजपुर, गया, औरंगाबाद और जहानाबाद में 1994 से 1999 के बीच 300 से भी अधिक दलितों को बर्बरता पूर्वक मार दिया गया था। मरने वाले लोगो में जयादातर महिलाये तथा बच्चे थे। कुछ महिलाएं तो गर्भबती थी उन को भी हत्यारों बक्शा। हत्या के लिए जिम्मेदार एक ही संगठन था उस के नाम था रणवीर सेना

यह रणवीर सेना ऊँची जातियों की एक हथियार बंद गिरोह था जो की आधुनिक हटियारो जैसे AK-47, लाइट मशीन गन (LMG) आदि से लैश होता था । इस सेना के सदस्य मुख्यतया ठाकुर और ब्राह्मण जाती से थे। 1990 दसक में भूमि हीन दलित और आदिवासियो ने बेगार करने से माना कर दिया था जिससे भूमिहार लोगो को परेशानी होने लगी थी। इसी के फलस्वरूप ठाकुर और भूमिहार लोगो ने मिल कर रणवीर सेना का गठन किया।

रणवीर सेना ने छह प्रमुख नरसनहारो को अंजाम दिया जिनमे 300 से अधिक गरीब गलितों को मारा गया। ये हैं सरथुया(1995), बथानी तोला (1996), लकसमानपुर बाथे(1997), शंकर बीघा (1999), मियानपुर (2000) और इकवारी (1997) में।
शंकर बीघा गाव में बिखरी लाशें 
हाल ही में कोबरपोस्ट ने एक स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा किया हैं की रणवीर सेना को किस तरह राजनतिक , आर्थिक और कानूनी मदद मिली थी। रणवीर सेना के हत्यारो ने कैमरा के सामने कबूल किया हैं की सारी हटाएँ उन्होने ही की थी लेकिन राजनतिक पहुच, भ्रस्ट पुलिस और लचार न्यायप्रणाली के चलते उन्हें सजा नहीं हुई।

कोबरपोस्ट के एक पत्रकार ने अपराधियो का इंटरव्यू यह कहते हुए लिया की वह एक फिल्म निर्माता हैं और रणवीर सेना पर एक फिल्म बना रहा हैं । उन्होने चंदरेश्वर, प्रमोद सिंह, भोला सिंह, अरविंद कुमार सिंह, सिद्धनाथ सिंह और रवींद्र चौधरी का साक्षात्कार लिया और वे सभी उन्होने जो हत्याएँ की हैं उनको बड़े ही गर्व पूर्वक बता रहे थे।

उन्होने यह तक बताया की भारतीय जनता पार्टी के कुछ आला नेता उनकी मदद करते रहे हैं । एक पूर्व प्रधान मंत्री ने उनको सेना के आधुनिक हतियार दिलवाने में मदद की, एक पूर्व बित्त मंत्री ने उनकी किस तरह मदद की, किस तरह से उन लोगो ने हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली थी। सेना के पूर्व जवान उनको ट्रेनिंग देते थे, एक राजनेता ने तो पुलिस को पास आते देख अपनी गाड़ी में उनको बैठा के पुलिस से बचाया था।

इन नेताओं का नाम उजागर होने के भय से ही BJP-JDU ने सत्ता में आते ही अमीरदास आयोग को भंग कर दिया गया था जो इन हत्याओ की जाँच कर रहा था । "कोबरा पोस्ट" ने "आपरेशन ब्लैक रेन" के तहत अमीरदास आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अमीर दास और बच गए चश्मदीद गवाहों के इंटरव्यू के जरिए यह खुलासा किया है।

आज भी ये हत्यारे आज़ाद घूम रहे हैं और ज़्यादातर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। कोबरा पोस्ट का सामने अपने अपराधो को कबूल करते हुए इन हत्यारों को चेहरों पर जरा भी सिकन न थी।  

Source :कोबरा पोस्ट 


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