दलित को शरण दी तो 50 हजार जुर्माना

कोई टिप्पणी नहीं
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व सन्ध्या पर उस तालिबानी सोच का उदाहरण पेश कर रहा हूँ जो भारत की स्वतंत्रता पर ग्रहण लगाती है। मथुरा जिले की एक घटना थाना नौहझील के गाँव पारसौली की है। विगत 9 अगस्त को नब्बे बामन और चन्दो जाटव शराब पी रहे थे पिन्नक में दोनों में झगड़ा हो गया और चन्दो चुटैल हो गया। चन्दो के कुछ परिजनों ने नब्बे से मारपीट कर घायल कर दिया। दोनों पक्षों की रिपोर्ट भी दर्ज हो गयी।बाद में जाट यह घटना (बामन का अपमान) सहन नहीं कर सके और तनावपूर्ण स्थिति हो गयी।यहाँ उल्लेखनीय है कि पिछड़े (जाट) जिन्हें सवर्णों की "सोशल पुलिस"कहा जाता है ज्यादा आहत नजर आ रही है। जाटों की पंचायत ने किसी दलित को शरण देने के जुर्म में 50 हजार का जुर्माना तथा किसी सवर्ण के खेत में घुसने पर 5 हजार रुपये जुर्माना लगाने का फैसला सुना दिया है। खबर है कि सोशल पुलिस के डर से करीबन 50 दलित परिवार गाँव से पलायन करने को मजबूर हुए हैं।


अफसोस ही व्यक्त किया जा सकता है,उस घिनौनी सोच पर जिसके अनुसार समाज में दलितों पर सामान्य से अपराध पर थाने चौकी और अदालतों के अलावा जातीय पंचायतें तालिबानी हुकुम सुनाती हैं और तमाम तरह की सामन्तवादी पाबन्दी लगाती हैं। यही पंचायतें उन जघन्य अपराधियों पर कोई पाबन्दी नहीं लगाती हैं जो दलितों के विरुद्ध अपराध करते हैं क्यों? ऐसी वहशी पंचायतें एकाकी फैसले सुनाकर अपनी पाशविक सोच का क्रूर प्रदर्शन करती हैं जिसकी एक भारतीय नागरिक को सच्चे दिल से घोर निन्दा करनी चाहिए। जहाँ हम भारत के लोग 69 वें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर खुशी के आलम में रंगे हुए हैं वहाँ ऐसी अमानवीय घटनाएँ निश्चित रूप से हम दलितों को यह आभास कराती हैं कि आजादी में कुछ न कुछ खामी है वरना सामान्य से अपराध की प्रतिक्रिया में इस तरह पाबन्दियाँ-बन्दिशें लगायी जायें तो क्यों?हमें आवश्यक रूप से सामाजिक आजादी के लिए बलिदान देने के लिए तत्पर रहना होगा, तभी ऐसे पाशविक सोच के जमूरों को हतोत्साहित किया जा सकता है,अन्यथा हमारा भारत ऐसे ही कलंक कथाओं का मंचन देखने को मजबूर होगा।






मथुरा (नौहझील): नौहझील क्षेत्र के गांव पारसौली में गुरुवार को जाट समाज के कुछ लोगों ने पंचायत कर दलितों को शरण देने वाले परिवार पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने का तुगलकी फरमान सुनाया। जबकि अपने खेतों पर दलितों को घुसने की अनुमति देने वालों को पांच हजार रुपये जुर्माना देना होगा। इस पंचायत से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 50 दलित परिवार गांव से पलायन कर गए हैं।
नौ अगस्त को गांव पारसौली निवासी ब्राह्माण नब्बे और जाटव समाज का चंदो शराब पी रहे थे, तभी किसी बात को लेकर नब्बे ने चंदो से मारपीट कर उसे घायल कर दिया। इस पर जाटव समाज के अन्य लोगों ने नब्बे से मारपीट कर डाली और उसे लहूलुहान कर दिया। तभी से गांव में कुछ लोग इस विवाद को जातीय संघर्ष का रूप देने में लगे हैं। कुछ लोग आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस विवाद का सियासी लाभ उठाने की फिराक में हैं। हालांकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा चुके हैं। मगर समाज विशेष के कुछ लोगों के आक्रामक रवैये से डरकर अब तक जाटव समाज के 50 परिवार पलायन कर गए हैं। दलित समाज के लोग केंद्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग से गुहार लगा चुके हैं। आयोग ने पुलिस-प्रशासन के आला अफसरों को दलित परिवारों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। तभी से पुलिस गांव के लोगों की गतिविधियों पर नजर रखे है। शांति बनाए रखने को पुलिस तैनात की है।

थाना नौहझील के एसओ प्रेमचंद का कहना है कि जाट समाज के कुछ युवकों ने पंचायत की थी। गांव के बुजुर्गो ने उनको समझाया है। सभी ग्रामीणों से दलित परिवार के लोगों को परेशान न करने को कहा है। कुछ लोग दोनों पक्षों में समझौता कराने का प्रयास कर रहे हैं।


कोई टिप्पणी नहीं :

एक टिप्पणी भेजें