हरियाणा के 100 दलित परिवारों ने इस्‍लाम कबूला

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दिल्ली के जंतर मंतर पर हरियाणा के भगाना गांव के करीब 100 दलित परिवारों ने शनिवार (08/08/2015) को इस्लाम धर्म कबूल कर लिया। इस खबर से जिले व भगाना क्षेत्र में हड़कंप मच गया। ये परिवार सन् 2012 में दबंगों से जमीन विवाद के कारण गांव से पलायन कर गए थे। कुछ माह पहले ही उनकी गांव में वापसी हुई थी। 

गांव भगना में 21 मई 2012 को गाव में दलित लोगोँ का दबंगों से विवाद हुआ था। दबंगों ने उनका बहिष्कार कर दिया था। दबंगों ने गांव के खेल मैदान में दलित परिवारों के बच्चों को नहीं खेलने देने का फरमान भी सुना दिया और गांव के लाल डोरे के चौक व दलितों के घरों के आगे दीवार बना दी थी।

इसके बाद करीब 137 परिवार गांव से पलायन कर गए थे। इसके बाद वे हिसार के लघु सचिवालय के समक्ष धरने पर बैठ गए। यह घटना काफी सुर्खियों में रहा था। उनका धरना दो साल तक चला। हुड्डा सरकार के शुरू हुआ धरना भाजपा सरकार के कार्यकाल में खत्म हुआ और मुख्यमंत्री मनोहर लाल की पहल पर इन परिवारों की गांव में वापसी हुई। धरना करीब चार माह पहले खत्म हुआ और परिवारों को प्रशासन ने सुरक्षा व सुविधा का आश्वासन देकर गांव वापस भेजा था।

इसके बावजूद उनके कुछ प्रतिनिधि दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना दे रहे थे। उन्होंने 30 जुलाई तक जंतर-मंतर पर सांकेतिक धरना दिया। शनिवार काे अचानक हुए घटनाक्रम से जिले व गांव में हड़कंप मच गया। गांव व आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। गांव भगाना में अभी शांति है, लेकिन गांव व आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

शनिवार को करीब 100 दलित परिवार दिल्ली जंतर मंतर पर पहुंचे और धर्म परिवर्तन का ऐलान करते हुए कलमा पढ़ा। धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों का कहना है कि हिंदू धर्म में होते हुए भी उनके धर्म के लोग उनके साथ समान व्यवहार नहीं करते थे। इस कारण उन्होंने इस्लाम कबूलने का फैसला किया। उन्होंने सरकार से दबंगों पर कार्रवाई की मांग की।

इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के रामपुर में 800 से अधिक दलित परिवार तंग आ कर इस्लाम ग्रहण कर चुके हैं। यह घटना हिन्दू धर्म  में घर वापसी करवाने वालो के लिए एक चेतावनी की तरह हैं। 

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