दलित मानहानि मुद्दे पर बाहुबली फिल्म के संवाद लेखक ने स्पस्टीकरण दिया

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बहुचर्चित फिल्म बाहुबली जिस के कुछ संवाद को लेकर दलित संगठनो ने प्रदर्शन किया था के संवाद लेखक मधान कार्की ने स्पस्टीकरण देते हुए  कहा हैं की उन का उददेश्य किसी की भावनाओ को ठेष पहुचाना नहीं था। 
उन्होंने कहा की मुझे मीडिया के माध्यम से इस घटना का पता चला। 

फिल्म के तमिल वर्जन के एक  डायलॉग "एन थायईयुम थाई नात्तियुम एंधा पगडैक्कु पिरंधवानुम थोडा मुड़ियाधु .." जिसका मतलब होता हैं एक व्यक्ति जिसका जन्म जुए के खेल में हार की वजह से हुआ हो को लेकर दलितों को आप्पति थी। 
लेखक ने बताया की उन को यह पता नहीं था की यह किसी जाति का भी नाम हैं। यहाँ तक की जो हीरो इस डायलॉग को बोलता हैं वो वचपन से ही ऐसा दिखाया गया हैं जो जातिवाद के खिलाफ हैं और सभी को एक सामान समझता हैं। अतः ऐसा हीरो किसी जाती के लिए अपमान जनक बातें बोल ही नहीं सकता। 

आगे उन्होंने यह भी कहा की फिल्म का इरादा किसी का अपमान करना नहीं था। किसी की भावनाओ को ठेस न पहुंचे इस लिए फिल्म क लिए एक अलग ही भाषा का विकास किया गया हैं। फिर भी उन्होंने उन शव्दो को फिल्म से हटाने का भरोसा दिलाया तथा सभी से माफ़ी मांगी। 

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