दलित दूल्हा अपनी शादी में घोड़े की सवारी करने के लिए सुरक्षा मांग रहा है

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ऊंची जातियों के लोगों द्वारा एक हमले के डर से दलित समुदाय का एक युवक राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद ब्लॉक के दांता गांव  में बारात के दौरान सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन गुहार लगा रहा है। इस गांव में कोई दलित कभी अपनी शादी या बारात में घोड़े पर नहीं बैठा है। इस मामले की शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने नसीराबाद पुलिस से इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा हैं ।
दलित ग्रामीणों ने की वे पहले भी सेवानिवृत्ति और शादी बारात के मौके पर घोड़े पर बैठने की कोशिस कर चुके हैं लेकिन उच्च जाति के लोगो द्वारा हर बार पीटा गया था। दो महीने पहले एक दलित दूल्हे एक घोड़े पर बैठ गया और बारात स्थल के लिए निकल रहा था तो नाराज ग्रामीणों ने उन पर पत्थर फेंके थे।  

राकेश नाम के लड़के की शनिवार (25/07/2015) को गांव की एक लड़की से शादी हैं और रविवार को मेहमानो के लिए भोजन पार्टी का आयोजन किया जाना हैं। राकेश के भाई ने बताया की उन्हें ऊँची जात के लोगो ने घोड़े पर बैठने से मना किया हैं और चेतावनी दी हैं की उन की बात नहीं मानी तो उस का परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा हैं। इस गाँव में पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जब शादी में घोड़े पर बैठने की वजह से दूल्हे और उस के रिश्तेदारो को बुरी तरह से पीटा गया हैं।

लगभग एक दर्जन दलित परिवारों ने गुरुवार को अजमेर में जिला प्रशासन से गुहार लगायी हैं की उन् को बारात और समारोह के लिए सुरक्षा दी जाये। राकेश के ज्यादातर रिस्तेदार शादी में शामिल होने से मन कर रहे हैं उन्हें डर हैं की वहा ज़रूर कोई हंगामा होगा। 

दांता गांव में गुर्जरों की आवादी सबसे ज्यादा हैं और इस समुदाय के 275 घर हैं। इस के अलावा राजपूतों के 25 परिवार, दरोगाओ के भी  25 परिवार, 30 माली परिवारों, कुम्हारो  के 40 और मेघवालो के 15 परिवार गाँव  में रहते हैं। राजपूत और गुर्जर गांव का नेतृत्व करते हैं और गांव के लिए ऐसे कानून पारित करते हैं ।

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