यूपी में अब गैर दलितों को भी जमीन बेच सकेंगे दलित, माननी होंगी तीन शर्तें

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यूपी में अनुसूचित जाति का व्‍यक्ति अब अपनी जमीन को किसी गैर अनुसूचित जाति के व्‍यक्ति को आसानी से बेच सकता है। ऐसा करने के लिए उसे जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होगी। वहीं, यदि उसके पास 3.125 एकड़ से कम जमीन बचती है तो तीन शर्तों के तहत सरकार ने उसे बेचने लिए राहत दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, पहली शर्त यह होगी कि जमीन बेचने वाले दलित का कोई वारिस न बचा हो। दूसरी, अनुसूचित जाति का व्यक्ति किसी दूसरे प्रदेश में या कहीं और बस गया हो। तीसरी शर्त कि परिवार के किसी सदस्य के जानलेवा बीमारी से ग्रस्त होने पर विपदा की स्थिति में इलाज के लिए जमीन बेचना उसके लिए अपरिहार्य हो जाए।


बताते चलें कि अभी तक लागू उत्तर प्रदेश जमींदार विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 के तहत अनुसूचित जाति के किसी भी व्यक्ति को अपनी खेती की जमीन किसी गैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को बेचने के लिए जिलाधिकारी से मंजूरी लेना अनिवार्य है। मंजूरी देते समय जिलाधिकारी यह देखते हैं कि जमीन बेचने के बाद अनुसूचित जाति के व्यक्ति के पास 3.125 एकड़ से कम जमीन बचेगी या नहीं। यदि अनुसूचित जाति के पास 3.125 एकड़ से कम जमीन बच रही हो तो जिलाधिकारी उसे जमीन बेचने की अनुमति नहीं देते हैं।

अब अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की खास जरूरतों का ख्याल करते हुए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2015 में यह प्रावधान किया गया है। राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2015 का प्रारूप तैयार करने के लिए अपर महाधिवक्ता राज बहादुर सिंह यादव की अध्यक्षता में गठित प्रारूप समिति ने सरकार से राजस्व कानून में संशोधन की यह सिफारिश की है।

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