अपने ही सम्मान समारोह में रो पड़ीं गोल्ड मेडलिस्ट दलित तीरंदाज

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जानू  हांसदा 
अमेरिका में हाल में हुए वर्ल्ड पुलिस गेम में तीन गोल्ड मेडल जीतने वाली झानू हांसदा अपने ही सम्मान समारोह में रो पड़ीं। झारखंड पुलिस की सब इंस्पेक्टर झानू का आरोप है कि उन्हें पिछड़ी जाति का होने के नाते प्रमोशन नहीं दिया गया।  
उन्होंने कहा कि पुलिस में ऊंची जाति की चलती है। झानू ने अभी तक 150 मेडल जीत कर झारखंड का नाम रोशन किया है उनकी उपलब्धि के सामने तीरंदाज दीपिका की उपलब्धि काफी छोटी मालूम होती है। गौरतलब है की सरकार ने खेल कोटे से सब इंस्पेक्टर के पद पर साल 2004 में नौकरी दी थी। 10 साल हो गए वो आज भी अपने विभाग में सब इंस्पेक्टर के पोस्ट पर ही हैं। 
झारखंड पुलिस में जाति के आधार पर होता है प्रमोशन
झानू को प्रमोशन नहीं मिला जबकि बाद में बॉक्सर अरुणिमा और कई साथी खिलाड़ियों को प्रमोशन मिल चुका है। इसी वजह से झानू सम्मान समारोह में फफक-फफक कर रो पड़ीं। 9 जुलाई को अमेरिका से लौटीं इंटरनेशनल लेवल की तीरंदाज झानू ने रोते हुए कहा कि जाति के आधार पर झारखंड पुलिस में पोस्टिंग और प्रमोशन होता है, जिसकी वो शिकार हुई हैं। दलित एवं अदिवासी खिलाड़ियों की उपलव्धियाँ ऊपरी जाती के खिलाड़ियों से कही ज्यादा होते हुए भी उन्हें उन का हक  नहीं दिया जाता।  
IG ने दिलाया न्याय का भरोसा
झानू जब रो रही थीं, तब वहां झारखंड पुलिस के कई सीनियर पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। गौरतलब है की सीआईडी यानी क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट की ओर से आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया। हालांकि उनके भावुक होने के बाद CID के IG रेजी डुंगडुंग ने न्याय का भरोसा दिलाया है। 
गोल्ड मेडल जीतने पर नहीं मिला 'सम्मान'
वैसे हकीकत ये भी है की जब झानू अमेरिका से तीन गोल्ड लेकर वापस देश लौटी थीं तो रांची में सरकार या पुलिस की ओर से उनका स्वागत करने के लिए कोई मौजूद नहीं था। झानू के पति और उनके कुछ दोस्तों ने उन्हें रिसीव किया था. इसके बाद वह ऑटो से बस स्टैंड गईं और बस में बैठकर अपने घर जमशेदपुर के लिए रवाना हो गईं। जमशेदपुर में भी उनके स्वागत के लिए कोई मौजूद नहीं था। वहीं, बताया जा रहा है कि गोल्ड मेडल जीतकर अमेरिका से लौटीं बॉक्सर अरुणा मिश्रा का रांची और जमशेदपुर में जबरदस्त स्वागत हुआ। 

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