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कुछ लोग मुझ पर हिन्दुत्व को तोड़ने का निराधार आक्षेप लगाते हैं ।उन लोगों को मेरे लेखों से यह आपत्ति है कि ऐसे लेखों से हिंदुओं में फूट उत्पन्न होगी । 
उनसे मुझे निम्न सवालों के जबाव चाहिये :-
1. उच्च हिन्दू पशुओं का मूत्र पी लेते हैं , लेकिन निम्न वर्णीय हिंदुओं के पानी को छू लेने से उनको अछूत लग जाती है और वह अछूत गाय के मूत्र से शुद्ध हो जाती है । 
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
2. उच्च हिन्दू मन्दिरों में प्रवेश कर सकते हैं लेकिन नीच हिंदुओं को मन्दिरों में प्रवेश वर्जित है ।
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
3. उच्च हिंदुओं के दूल्हे घोड़े पर बैठ कर शादी रचा सकते हैं । लेकिन नीच हिंदुओं के दूल्हों को घोड़े पर बैठना वर्जित है ।
-क्या इससे हिंदुओं में फूट उत्पन्न नही होती है ?
4. उच्च हिन्दू नीच हिंदुओं से जातिपान्ति के नाम पर छुआछूत करते हैं ।
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
5. रोटी बेटी का सम्बन्ध सबसे गहरा सम्बन्ध होता है । लेकिन रोटी बेटी का सम्बन्ध हिन्दू लोग आपस में ही नही रखते हैं ।
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होगी ?
6. उच्च हिन्दू नीच हिंदुओं को अपने कुए से पानी तक नही भरने देते ।
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होगी ?
7. हिन्दू हिन्दू आपस में ही भाईचारे के स्थान पर दुराचार का भाव रखते हैं ।
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
8. विदेशी आर्य संस्कृति के समस्त ग्रन्थ समस्त नीच हिंदुओं (Sc/St/OBC) को नीच अछूत की गाली देते हैं।
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
जैसे –
'जे वर्णाधम तेली कुम्हारा |
स्वपच, किरात कोल कलवारा ||'
-(रामचरित मानस के पृष्ठ 870 पर गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि तेली, कुम्हार, चाण्डाल, भील, कोल और कल्हार आदि वर्ण में नीचे हैं अर्थात शूद्र हैं |)
वर्द्धकी नापितो गोप : आशाप : कुंभकारक |
वाणिक्कित कायस्थ मालाकार कुटुंबिन ||
वरहो मेद चंडाल : दासी स्वपच कोलका |
एषां सम्भाषणात्स्नानं दर्शनादार्क वीक्षणम ||
( व्यास स्मृति:– 1/11-12)
-अर्थात – व्यास स्मृति के अध्याय – 1 के श्लोक 11 एवं 12 से भारतीय समाज को शिक्षा मिलती है कि बढई, नाई, ग्वाल, कुम्हार, बनिया, किरात, कायस्थ, भंगी, कोल, चंडाल ये सब शूद्र (नीच) कहलाते हैं .
इनसे बात करने पर स्नान और इनको देख लेने पर सूर्य के दर्शन से शुद्धि होती है |
9. विदेशी आर्य-संस्कृति के देवी-देवता या भगवान नीच हिंदुओं को गाली देते हैं ।
-क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ? जैसे :–
“मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य,येऽपि स्यु:पापयोनय: ।
स्त्रियो वैश्वास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ।।32।।”
-'हे अर्जुन ! स्त्री, वैश्य, तथा शुद्रादि पापयोनि भी, मेरी शरण होकर परमगति को ही प्राप्त होते हैं ।।32।।
(गीता अध्याय – 9 श्लोक 32)
[अर्थात – स्त्री , शूद्र तथा वैश्य पापयोनि के होते हैं ? क्या यह जरूरी है कि ब्राह्मण और क्षत्रीय पुरूष पुण्ययोनि के ही होते हैं, और बाकी सब जन्म से ही पापयोनि के ?]
10. उच्च हिंदुओं द्वारा नीच हिंदुओं के साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार किया जाता है । क्या इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
11. पाठशालाओं और अन्य सार्वजनिक स्थलों में आज भी जब उच्च हिंदुओं के बच्चों से निम्न वर्ग हिंदुओं के बच्चों को खाने के लिए अलग बैठाया जाता है । क्या तब इससे हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
12. जाति और वर्णों के हिसाब से निवास होने से क्या हिंदुओं में फ़ूट उत्पन्न नही होती है ?
.....सागर गौतम उपद्रवी राज .....

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